Korbavani.com। पाली जनपद क्षेत्र की ग्राम पंचायत ईरफ में उपसरपंच को अविश्वास प्रस्ताव के जरिए पद से हटाए जाने का मामला अब विवादों के घेरे में आ गया है। सोमवार को आयोजित जनदर्शन में 200 से अधिक ग्रामीणों, पंचों और महिला जनप्रतिनिधियों के साथ पहुंचे पूर्व उपसरपंच ने पूरे घटनाक्रम को सुनियोजित साजिश बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। जनदर्शन में सौंपे गए आवेदन में पूर्व उपसरपंच ने आरोप लगाया कि उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर 5 मई को सुशासन तिहार के दौरान पंचायत में हो रही कथित वित्तीय अनियमितताओं, शासकीय राशि के दुरुपयोग और मनमानी कार्यप्रणाली की शिकायत की थी। शिकायत में पंचायत के सरपंच और सचिव के खिलाफ जांच एवं कार्रवाई की मांग की गई थी। उनका आरोप है कि शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें ही निशाना बनाकर अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। पूर्व उपसरपंच का कहना है कि सरपंच, सचिव और जनपद स्तर के अधिकारियों की मिलीभगत से पंचों को गुमराह किया गया। आरोप है कि कई पंचों से कोरे कागजों पर हस्ताक्षर कराए गए और उन्हें वास्तविक स्थिति की जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने दावा किया कि पंचायत में हुए समझौते और अविश्वास प्रस्ताव वापस लेने संबंधी आवेदन को भी नजरअंदाज कर दिया गया।मामले को लेकर महिला पंचों ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उन्हें पंचायत बैठक का हवाला देकर वाहन में बैठाकर पाली ले जाया गया। आरोप है कि रातभर उन्हें विभिन्न स्थानों पर घुमाया गया और अगले दिन खाली कागजों पर हस्ताक्षर करा लिए गए। महिला पंचों का दावा है कि उन्हें यह तक नहीं बताया गया था कि उपसरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की कार्रवाई चल रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में हो रहे कथित भ्रष्टाचार और फर्जी आहरण को उजागर करने की वजह से उपसरपंच को पद से हटाया गया। उन्होंने जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों का दायित्व विकास कार्यों को गति देना और अनियमितताओं पर कार्रवाई करना है, लेकिन यहां शिकायतकर्ताओं को ही परेशान किया जा रहा है। जनदर्शन में पहुंचे ग्रामीणों ने पंचायत सचिव को तत्काल हटाने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि सचिव दो दशक से अधिक समय से एक ही पंचायत में पदस्थ हैं, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से सचिव के स्थानांतरण और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। वहीं जनदर्शन में मौजूद अधिकारियों ने शिकायत प्राप्त कर मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया है। अब यह मामला केवल एक अविश्वास प्रस्ताव तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पंचायत व्यवस्था, प्रशासनिक निष्पक्षता और ग्रामीण लोकतंत्र की विश्वसनीयता से भी जुड़ता नजर आ रहा है। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया थी या फिर शिकायतकर्ताओं के आरोपों के अनुरूप कोई सुनियोजित साजिश।
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