Korbavani.com। जिले में बीते शनिवार 30 मई 2026 की शाम आए तेज आंधी-तूफान का असर अब भी कई ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। प्राकृतिक आपदा के साथ-साथ इस घटना ने विद्युत विभाग की तैयारियों और रखरखाव व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। पोड़ी उपरोड़ा विद्युत उपकेंद्र अंतर्गत गुरसिया फीडर क्षेत्र में कई स्थानों पर पेड़ गिरने से 11 केवी एवं 33 केवी विद्युत लाइनें तथा पोल क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिसके कारण दर्जनों गांवों में पिछले लगभग दो दिनों से बिजली आपूर्ति ठप पड़ी हुई है। बिजली आपूर्ति बाधित होने से संबंधित ग्राम पंचायतों के गांव अंधेरे में डूबे हुए हैं। सबसे अधिक परेशानी पेयजल व्यवस्था को लेकर सामने आ रही है। बिजली नहीं होने से मोटर पंप बंद पड़े हैं, जिससे ग्रामीणों को पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। गर्मी के मौसम में यह संकट लोगों की दैनिक दिनचर्या को भी प्रभावित कर रहा है।ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र वनांचल एवं पहाड़ी इलाकों से घिरा हुआ है, जहां हाथी, जहरीले सांप, बिच्छू तथा भालू जैसे वन्यजीवों की मौजूदगी बनी रहती है। ऐसे में रात के समय अंधेरा छा जाने से लोगों में भय का माहौल है। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे विशेष रूप से परेशान हैं। कई गांवों में लोगों को मोबाइल चार्जिंग, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि विद्युत विभाग द्वारा समय रहते हाईटेंशन तारों और बिजली खंभों के आसपास खड़े पेड़ों की छंटाई कराई गई होती तो नुकसान की स्थिति काफी हद तक टाली जा सकती थी। ग्रामीणों के अनुसार हर वर्ष मानसून और आंधी-तूफान से पहले ऐसे कार्य किए जाने चाहिए, लेकिन इस दिशा में पर्याप्त गंभीरता नहीं दिखाई गई।इधर, दो दिनों से अधिक समय बीत जाने के बावजूद मरम्मत कार्य की धीमी गति को लेकर भी लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि विभागीय अमला क्षतिग्रस्त लाइनों को दुरुस्त करने में अपेक्षित तेजी नहीं दिखा रहा है। क्षेत्रवासियों ने शीघ्र विद्युत आपूर्ति बहाल करने तथा भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए स्थायी और प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
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