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प्रशासन के आदेश को चुनौती? निलंबन के बाद भी ‘सरपंच’ पदनाम का उपयोग जारी, ग्रामीणों ने उठाए सवाल…

Korbavani.com। पोड़ी उपरोड़ा जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत गुरसिया में वित्तीय अनियमितताओं के मामले में निलंबित की गई सरपंच हेमलता बघेल एक बार फिर विवादों में हैं। आरोप है कि निलंबन आदेश जारी होने के बावजूद वे स्वयं को ग्राम पंचायत का सरपंच बताते हुए पोस्टर और प्रचार सामग्री जारी कर रही हैं, जिससे ग्रामीणों में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।गौरतलब है कि ग्राम पंचायत गुरसिया में 37 लाख रुपये से अधिक की राशि निजी खाते में आहरित किए जाने सहित वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतों की जांच के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए हेमलता बघेल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) ने छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 की धारा 39(1) के तहत निलंबन आदेश जारी किया था। इसके साथ ही उनके विरुद्ध धारा 40 के तहत पद से पृथक करने की प्रक्रिया भी जारी है।अब ग्रामीणों का आरोप है कि निलंबित होने के बाद भी हेमलता बघेल स्वयं को सरपंच बताते हुए नए-नए पोस्टर जारी कर रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब प्रशासन द्वारा उन्हें सरपंच पद से निलंबित किया जा चुका है, तब आधिकारिक रूप से स्वयं को सरपंच लिखना नियमों के अनुरूप नहीं है। इससे पंचायत की वास्तविक प्रशासनिक स्थिति को लेकर लोगों में भ्रम फैल रहा है।ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) इस मामले का संज्ञान लें और यदि निलंबन अवधि में पद का दुरुपयोग किया जा रहा है तो नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।फिलहाल यह मामला पंचायत क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की नजर प्रशासन पर है कि निलंबन के बाद भी पदनाम के कथित उपयोग को लेकर आगे क्या कार्रवाई की जाती है।

Kush Sharma

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