Korbavani.com- प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप जिले की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक बड़ी पहल करते हुए 17 करोड़ 08 लाख 94 हजार रुपए की लागत से 108 स्कूल भवनों के निर्माण को स्वीकृति दी है। डीएमएफ (जिला खनिज न्यास निधि) मद से स्वीकृत इस योजना के तहत जिले के जर्जर और पुराने स्कूल भवनों को ध्वस्त कर उनके स्थान पर नवीन भवनों का निर्माण कराया जाएगा। इससे हजारों छात्र-छात्राओं को सुरक्षित, स्वच्छ और शिक्षाप्रद माहौल में पढ़ाई करने का अवसर मिलेगा।कलेक्टर अजीत वसंत ने निर्माण कार्यों के लिए विभिन्न विभागों को क्रियान्वयन एजेंसी नियुक्त कर त्वरित गति से कार्य प्रारंभ करने के निर्देश भी दिए हैं। इस योजना में जिले के सभी विकासखंडों की प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं को शामिल किया गया है, जहां वर्षों से भवन की कमी से शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही थी।
पाली पंचायत- 15 वर्षों से मिडिल स्कूल भवन का इंतजार, मांग के बावजूद नहीं हुआ प्रस्ताव एक ओर जहां जिले के 108 स्कूलों को नया जीवन देने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है, वहीं दूसरी ओर पौड़ी उपरोड़ा जनपद अंतर्गत पाली ग्राम पंचायत अब भी बुनियादी शैक्षणिक ढांचे के लिए संघर्ष कर रहा है। कोरबा जिला मुख्यालय से लगभग 110 किलोमीटर दूर स्थित यह क्षेत्र आज भी मिडिल स्कूल भवन से वंचित है। पिछले 15 वर्षों से यहां के विद्यार्थियों को कभी पंचायत भवन तो कभी आंगनबाड़ी केंद्र में बैठाकर शिक्षा दी जा रही है। बरसात के दिनों में स्थिति और भी खराब हो जाती है। छत टपकती है, जगह नहीं होती, जिससे बच्चों की पढ़ाई पर सीधा असर पड़ता है। पाली के सरपंच सुमार सिंह मरकाम इस गंभीर समस्या को लेकर कई बार जनदर्शन और समाधान शिविरों में आवेदन दे चुके हैं। लेकिन अब तक मिडिल स्कूल भवन के लिए कोई प्रस्ताव स्वीकृत नहीं किया गया है। सरपंच मरकाम का कहना है, “जब शासन बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की बात करता है, तो पाली जैसे दूरस्थ और वनवासी क्षेत्र को क्यों अनदेखा किया जा रहा है? गांव के ग्रामीणों का भी यही कहना है कि शिक्षा ही उनके बच्चों का भविष्य बना सकती है, लेकिन विद्यालय भवन जैसी बुनियादी सुविधा के अभाव में उनके सपने अधूरे रह जा रहे हैं।
प्रशासन से उम्मीद, पाली को मिले प्राथमिकता– पाली पंचायत की स्थिति उन इलाकों की सच्चाई बयां करती है जो योजनाओं की घोषणा में शामिल नहीं हो पाते। जहां एक ओर प्रशासन शिक्षा सुधार के व्यापक अभियान में जुटा है, वहीं यह भी जरूरी है कि जिन क्षेत्रों की आवाज लंबे समय से अनसुनी रही है, उन्हें प्राथमिकता दी जाए। पाली ग्राम पंचायत के मिडिल स्कूल भवन का प्रस्ताव शीघ्र स्वीकृत किया जाए, ताकि वहां के बच्चों को भी अन्य विद्यार्थियों की तरह एक बेहतर, सुरक्षित और स्थायी शैक्षणिक माहौल मिल सके। ग्रामीणों का भरोसा शासन-प्रशासन पर तभी कायम रहेगा, जब विकास की रोशनी सब तक समान रूप से पहुंचेगी।
पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड – खिरटी पंचायत के रनईपारा, ग्राम पंचायत परला के ललमटटापारा, ग्राम पंचायत सारिसमार के बंशीपेन्द्रो में एवं ग्राम पंचायत सरभोका के आश्रम में नवीन प्राथमिक शाला भवन निर्माण हेतु 15-15 लाख, ग्राम पंचायत मेरई अंतर्गत मुडमिसिनी, पचरा के नदियापार, मानिकपुर के शाहीपुर, खिरटी के पण्ड्राआमा, कोडगार के महादेवपारा, ग्राम पंचायत पसान के गोलाबहरा, दर्रीपारा, बालमपुर, पोड़ीकला के पोड़ीपारा, बरदापखना, सैला के पथराडांड, अडसरा के घाघरा, रानीअटारी, जटगा के बरेलियापारा, मेरई के ठाकुरदईयापारा, साखो के बरभांठा, मदनपुर के कोदवारीपारा, कटोरीनगोई के कुकरीकाडर, कोडगार के पहाड़पारा, घुंचापुर के लालपुर, मोरगा के जूनापारा, भुलसीभवना, गुड़रूमुड़ा के कोड़ा, धजाक के जामबहार, मिसिया के करमीपारा, सिंधिया के कर्रा, ग्राम पंचायत केन्दई के केन्दई व आश्रित ग्राम रामभांठा, टिहलीसराई, पचरा के खुरूभांठा, लेपरा के नानलेपरा, सिर्री के बांधपारा, लैंगी के मोहनपुर में ग्राम पंचायत लाद, ग्राम पंचायत अटारी में पुराना भवन विनिष्टीकरण व नवीन प्राथमिक शाला भवन निर्माण के लिए प्रत्येक संस्थान हेतु 15 लाख 65 हजार, ग्राम पंचायत सुतर्रा व अमलडीहा में नवीन माध्यमिक शाला भवन निर्माण हेतु प्रत्येक संस्थान के लिए 15 लाख 85 हजार, ग्राम पंचायत मानिकपुर, सरभौंका, गिधमुड़ी, कुम्हारीसानी, लेपरा, सारिसमार, नगोईबछेरा, एवं ग्राम पंचायत केन्दई के टिहलीसराई, मोरगा के भुलसीभवना, ग्राम पंचायत कोनकोना के बरौदखार, खोडरी प के खम्हरिया, अमलीकुण्डा के अमलीकुण्डा बसाहट व झुनकीडीह, मातिन के मातीन बसाहट व लोड़ीबहरा में पुराने भवन विनिष्टीकरण व नवीन माध्यमिक शाला भवन निर्माण के लिए प्रत्येक संस्थान हेतु 16 लाख 60 हजार की राशि स्वीकृत की गई है।




