Korbavani.com- जिला के पोड़ी-उपरोड़ा विकासखंड अंतर्गत ब्राम्हणपारा निवासी शिवांशु पोर्ते का जीवन एक समय चुनौतियों से भरा था। जन्म से ही उसके दाहिने पैर में विकृति थी, जिसे चिकित्सकीय भाषा में क्लबफुट कहा जाता है। इस स्थिति में बच्चा सामान्य रूप से चल-फिर नहीं पाता, जिससे उसके माता-पिता बेहद चिंतित थे। आर्थिक रूप से सामान्य परिवार से ताल्लुक रखने वाले शिवांशु के माता-पिता के लिए यह परेशानी बहुत बड़ी थी।मई 2023 में जब शिवांशु की उम्र दो वर्ष थी, तब आरबीएसके (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) की चिरायु टीम क्रमांक-3 द्वारा ग्राम के आंगनबाड़ी केंद्र में आयोजित स्वास्थ्य परीक्षण शिविर में इस स्थिति की पहचान की गई। टीम ने उसके माता-पिता को चिरायु योजना के अंतर्गत मिलने वाले निःशुल्क उपचार की जानकारी दी और उपचार हेतु शासकीय मेडिकल कॉलेज कोरबा भेजा गया।कोरबा मेडिकल कॉलेज में हड्डी रोग विशेषज्ञों द्वारा टेनोटॉमी नामक शल्य चिकित्सा की गई, जिसमें लिगामेंट को विभाजित किया जाता है। ऑपरेशन के बाद शिवांशु के पैर में चार बार प्लास्टर चढ़ाया गया और आवश्यक दवाइयां दी गईं। साथ ही, इलाज को स्थायित्व देने के लिए विशेष जूते भी प्रदान किए गए। इलाज के परिणामस्वरूप अब शिवांशु पूरी तरह से स्वस्थ है और सामान्य बच्चों की तरह दौड़-भाग सकता है। उसकी मां संतोषी प्रधान ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यह न केवल चिकित्सा विज्ञान की उपलब्धि है, बल्कि चिरायु योजना और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की सक्रियता का प्रमाण भी है। उन्होंने समय पर पहचान और निःशुल्क उपचार के लिए जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग एवं चिरायु टीम का आभार प्रकट किया।
यह उदाहरण दर्शाता है कि सरकारी योजनाएं यदि समय पर और समर्पण के साथ लागू की जाएं तो न केवल जीवन बदल सकती हैं, बल्कि भविष्य को भी उज्ज्वल बना सकती हैं।




