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इंडस पब्लिक स्कूल दीपका में संचालित समर कैंप में आर्ट एंड क्राफ्ट एक्टिविटी के तहत अपनी कल्पनाओं को एक नया आयाम प्रदान करे रहे विद्यार्थी, विभिन्न प्रकार की कलाओं से खुद को पारंगत कर रहे…

कला से करें विकास की शुरुआत, हर बच्चे में छिपा है एक अनोखा जज़्बात- डॉक्टर संजय गुप्ता..

Korbavani.com- विद्यालयी शिक्षा में विभिन्न स्तरों पर इसके मूल्य को अनुभव किया जा सकता है। शिक्षा के महत्त्व को हम निम्न प्रकार से अभिव्यक्त कर सकते है ।कलात्मक योजनाओं में कलाकार अमूर्त विचारों को मूर्त रूप प्रदान करता है, उसके विचार, स्थिति का रूप ले लेते हैं। सभी ज्ञान मनुष्य की ज्ञानेन्द्रियों से उदय होता है, जो बौद्धिक कल्पना, आलोचना, निर्णय आदि मानसिक शक्तियों के माध्यम से विचारों में परिणित होता है और विचार, संवेदनाओं से मिलकर भावों का रूप ग्रहण करते हैं । कलात्मक योजनाओं में भावनाएं ही सर्वाधिक प्रभावी होती हैं। बालक के यह विचार, तथ्य तथा आकृतियाँ, जिनकी वह आवश्यकता अनुभव करता है, वह रचना को मूर्त देखने और अनुभव करने पर अधिक वास्तविक हो जाते हैं। कला, सीखने को सजीव बनाती है : चूँकि ‘कला’ दृष्टि से संबंधित है अतः यह सीखने की परिस्थिति के प्रत्येक स्तर को सजीव बनाती है । विचारों और भावनाओं को मूर्त रूप में देखकर बालक उनको अधिक समय तक मस्तिष्क में स्मरण रख सकता है और उनके अन्य वस्तुओं से संबंध को जानकर उनके वास्तविक महत्त्व की जानकारी प्राप्त कर सकता है । कुछ विचार जिनका बालक के लिए पहले कोई महत्त्व नहीं था, शीघ्र ही उसके सामने सजीव अनुभव बन जाते हैं और उसकी संपूर्ण मानसिक, आत्मिक और शारीरिक प्रक्रियाओं पर प्रभाव डालते हैं।कला सीखने को गहन और सजीव बनाती है। इसी कारण यह समस्या समाधान की उच्च क्षमता भी उत्पन्न करती है। यह अनुभव की गई वस्तुओं को एक नया अर्थ, नवीन सत्य देती है और उनमें नए संबंध स्थापित करती है। कला, मानसिक प्रक्रिया को अधिक अन्तःस्थ बनाती है और सीखने में उन भावनाओं को भी सम्मिलित करती है जो हम उन वस्तुओं के प्रति रखते हैं। यह भावात्मक प्रवृत्ति को जगाकर गत्यात्मक प्रत्युत्तरों के लिए प्रेरित करती हैं और विभिन्न ज्ञानेन्द्रियों में सहभागिता लाती है। इंडस पब्लिक स्कूल दीपका में संचालित समर कैंप में प्रतिभागी आर्ट एंड क्राफ्ट एक्टिविटी के तहत विभिन्न प्रकार की कला से पारंगत हो रहे हैं। आर्ट एंड क्राफ्ट के इंचार्ज अंशुल एवं रूपाली देवांगन के द्वारा विद्यार्थियों को पेपर आर्ट हैंडमेड पेंटिंग, बेस्ट आउट ऑफ़ वेस्ट, वर्ली आर्ट, मधुबनी आर्ट,मंडोला आर्ट इत्यादि से पारंगत किया जा रहा है। विद्यार्थियों को मिट्टी से अपने पात्रों में भी एक से बढ़कर एक चित्रकार एवं कलाकारी करना सिखाया जा रहा है। विद्यार्थी पेपर कटिंग कर एक से बढ़कर एक आर्ट के नमूने प्रस्तुत कर रहेहैं।विद्यार्थी रंग बिरंगे पेपर से बर्ड ,फ्लावर, डॉल,ट्री,सीनरी याद बनाना सीख रहे हैं।ब्रश एवं कलर से विभिन्न प्रकार के आकर्षक पेंटिंग से आर्ट हॉल सजा नजर आ रहा है।रंगों के संयोजन से विद्यार्थी अपनी कलाओं एवम कल्पनाओं को आकार दे रहे हैं।बालमन के कल्पनाओं की उड़ान पेपर एवं केनवाश पर देखते ही बनती है।गौरतलब है कि समर कैंप के क्लोजिंग सेरेमनी में इस सभी कलाओं का एग्जिबिशन किया जायेगा। आर्ट एंड क्राफ्ट प्रभारी अंशु ने बताया कि जब तक एकाकी विचारों, अनुभवों और तथ्यों को एकत्रित करके कोई प्रारूप न दिया जाए, तब तक वह हमारे लिए अर्थपूर्ण नहीं हो सकते । अतः शैक्षिक प्रक्रिया के लिए कला एक प्राकृतिक और तार्किक शक्ति है जो ज्ञान को बाँधती है, उसे सजीव और मूर्त बनाती है, जिससे मस्तिष्क दुरुह भावनाओं और मानवीय कार्यों उद्देश्य को भी ग्रहण कर सकें। विभिन्न प्रकार के कलाओं का ज्ञान देकर हम विद्यार्थियों की कल्पना को एक नया आयाम देना चाहते हैं। आर्ट एंड क्राफ्ट एक्टिविटी के अंतर्गत हम विद्यार्थियों के बाल मन की कल्पना के उड़ान को एक नई दिशा प्रदान कर सकारात्मक के ढांचे में ढालना चाहते हैं।

विद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर संजय गुप्ता ने कहा- आर्ट एंड क्राफ्ट एक्टिविटी समर कैंप में बच्चों के सीखने का सुनहरा अवसर होता है। इस एक्टिविटी के तहत विद्यार्थी विभिन्न प्रकार की कलाओं से स्वयं को पारंगत करते हैं। वे अपनी कल्पनाओं को एक नया आयाम प्रदान करते हैं ।अपनी कल्पनाओं को पेपर एवं कैनवास पर उतारते हैं।आर्ट एंड क्राफ्ट एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें हम उन चीजों को खोजते हैं जो हमारी भावनाओं और कार्यों के अनुरूप है। जैसे-जैसे हम कला का अधिक अभ्यास करते हैं वैसे-वैसे हम क्रियाओं में अधिकाधिक सामंजस्य करने की और मूल्यांकन की योग्यता प्राप्त करते हैं। हम निरन्तर अपनी कला का मूल्यांकन करते रहते हैं और सर्वाधिक उत्तम मूल्यांकन तभी संभव है जब कला को संपूर्णता में देखा जाये। प्रत्येक कलाकार के लिए अपनी रचना की निरंतर आलोचना एवं मूल्यांकन अपरिहार्य है।

Kush Sharma

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