Korbavani.com- पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत केशलपुर का गौठान इन दिनों अवैध ईंट निर्माण का केंद्र बन चुका है। जिस गौठान का निर्माण पशुपालन और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया था, वहीं अब निजी लाभ के लिए इसका दुरुपयोग खुलेआम किया जा रहा है।गौठान की देखरेख की जिम्मेदारी सरपंच और सचिव पर होती है, लेकिन यहां उनकी भूमिका सवालों के घेरे में है। आरोप है कि उनकी अनदेखी या मिलीभगत के चलते सरकारी संपत्ति का उपयोग अवैध ईंट भट्ठे के रूप में किया जा रहा है, जिससे कुछ निजी व्यक्तियों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। स्थिति और गंभीर तब हो जाती है जब यह गौठान जंगल के समीप स्थित है। ईंट पकाने के लिए बड़ी मात्रा में लकड़ी खपाई जा रही है, जिससे वन क्षेत्र को नुकसान पहुंच रहा है। वन परिक्षेत्र जटगा की निष्क्रियता भी इस पूरे मामले में स्पष्ट रूप से सामने आ रही है। वन विभाग और राजस्व विभाग को हो रहे नुकसान के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही। यह मामला केवल सरकारी जमीन के दुरुपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरणीय क्षति का भी बड़ा कारण बन रहा है। सवाल उठता है कि इस अवैध कारोबार के पीछे किसका संरक्षण है? क्या स्थानीय प्रशासन और वन विभाग की चुप्पी किसी बड़े गठजोड़ की ओर इशारा कर रही है? पोड़ी उपरोड़ा में अधिकारियों की कथित मेहरबानी का यह एक जीवंत उदाहरण बन चुका है, जहां गायों के लिए बना गौठान अब ईंट भट्ठे में तब्दील हो गया है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।
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