KORBAVANI.COM। खुशियां बांटने के लिए न दूरी मायने रखती है और न ही रास्तों की दुश्वारियां। जरूरत होती है तो केवल संवेदनशील सोच और दूसरों के चेहरे पर मुस्कान लाने के जज्बे की। इसी मानवीय भावना की मिसाल पेश करते हुए मास्टरमाइंड टीम ने जिले से लगभग 80 किलोमीटर दूर स्थित नाकिया ग्राम पंचायत के रपता मोहल्ला खराखेत की दुर्गम पहाड़ी कोरवा बस्ती में पहुंचकर छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस की 26वीं वर्षगांठ को विशेष अंदाज में मनाया। घने जंगलों, ऊबड़-खाबड़ रास्तों और पहाड़ों के बीच बसे इस गांव तक पहुंचना आसान नहीं था, लेकिन टीम के सदस्यों ने तमाम कठिनाइयों को पार करते हुए बस्ती के लोगों के बीच पहुंचने का संकल्प पूरा किया। यहां पहुंचकर टीम ने आदिवासी परिवारों के साथ समय बिताया और उन्हें स्थापना दिवस की खुशियों में सहभागी बनाया, इस अवसर पर बस्ती की महिलाओं को नई साड़ियां भेंट की गईं, बच्चों को पढ़ाई के लिए शैक्षणिक सामग्री प्रदान की गई तथा बुजुर्गों और सियानों को नए वस्त्र उपहार स्वरूप दिए गए। उपहार पाकर महिलाओं के चेहरों पर खुशी झलक उठी, वहीं बच्चों की आंखों में नई उम्मीद और उत्साह दिखाई दिया। लंबे समय से मुख्यधारा की सुविधाओं से दूर इस दुर्गम बस्ती में जब टीम के सदस्य आत्मीयता के साथ पहुंचे तो ग्रामीणों ने भी उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल उपहार बांटना नहीं, बल्कि समाज के उन लोगों तक खुशियां और अपनापन पहुंचाना था, जो भौगोलिक परिस्थितियों के कारण अक्सर बड़े आयोजनों और सामाजिक गतिविधियों से दूर रह जाते हैं। मास्टरमाइंड टीम की इस पहल ने यह संदेश दिया कि किसी भी उत्सव की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब उसकी खुशियां समाज के अंतिम छोर पर रहने वाले व्यक्ति तक पहुंचें। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित इस मानवीय पहल ने पहाड़ी कोरवा परिवारों के बीच उत्सव जैसा माहौल बना दिया। उपहारों के साथ मिले सम्मान, स्नेह और अपनत्व ने ग्रामीणों के चेहरों पर मुस्कान बिखेर दी। दुर्गम पहाड़ियों के बीच पहुंचकर खुशियां बांटने वाली मास्टरमाइंड टीम की यह पहल सामाजिक सरोकार और मानवीय संवेदना की एक सराहनीय मिसाल बन गई।





