घनी आबादी के बीच संचालन से महिलाएं और बच्चे परेशान, मंदिरों व स्कूल जाने वाले मार्ग पर असहज माहौल का आरोप..
Korbavani.com। रामपुर की देशी शराब दुकान का स्थानांतरण अब भी अधर में है। घनी आबादी के बीच संचालित इस दुकान को अन्यत्र हटाने की मांग लंबे समय से उठ रही है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। स्थानीय महिलाओं, रहवासियों और जनप्रतिनिधियों के विरोध के बावजूद दुकान का संचालन पुराने स्थान पर जारी है। ऐसे में आबकारी विभाग और प्रशासन की भूमिका पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। दुकान को हटाने की मांग को स्थानीय पार्षद चंद्रलोक सिंह सहित क्षेत्र के लोगों का समर्थन मिल चुका है। आदिवासी नेता ननकीराम कंवर के साथ भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने भी इस मांग का समर्थन किया है। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद लोगों को उम्मीद थी कि समस्या का समाधान होगा। क्षेत्रीय विधायक एवं उद्योग व आबकारी मंत्री लखनलाल देवांगन से भी स्थानीय नागरिकों को पहल की अपेक्षा थी। जानकारी के अनुसार, जुलाई में आबकारी विभाग ने दुकान को बरबसपुर मुख्य मार्ग पर स्थानांतरित करने का निर्णय लिया था, लेकिन ग्रामीणों और महिलाओं के विरोध के बाद यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद से दुकान पुराने स्थान पर ही संचालित हो रही है।
स्कूली बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता- रामपुर में शराब दुकान के आसपास घनी आबादी बसी हुई है। यह मार्ग बालको सहित आसपास के क्षेत्रों को जोड़ता है, जहां से प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग गुजरते हैं। स्कूली छात्र-छात्राओं का भी इसी रास्ते से आना-जाना होता है। स्थानीय रहवासियों का आरोप है कि दुकान के आसपास शराब सेवन करने वालों की मौजूदगी, गाली-गलौज और विवाद की स्थितियों के कारण महिलाओं और बच्चों को असहजता का सामना करना पड़ता है।
मंदिरों के आसपास भी व्यवस्था पर सवाल- शराब दुकान के नजदीक हनुमान मंदिर और अंधरी माता मंदिर स्थित हैं। यहां प्रतिदिन श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। नवरात्रि में अंधरी माता मंदिर में ज्योति प्रज्वलन के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही और बढ़ जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि धार्मिक स्थलों के आसपास शराब सेवन करने वालों की मौजूदगी से श्रद्धालुओं को परेशानी होती है।
दुकान बंद नहीं, आबादी से दूर स्थानांतरण की मांग- बस्ती की महिलाओं और अभिभावकों का कहना है कि बच्चों के सामाजिक वातावरण और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस समस्या का समाधान जरूरी है। स्थानीय नागरिकों की मांग शराब दुकान को बंद कराने की नहीं, बल्कि उसे घनी आबादी, स्कूलों और धार्मिक स्थलों से दूर किसी उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित करने की है। इससे शासन को राजस्व की प्राप्ति भी जारी रहेगी और रहवासियों को राहत मिल सकेगी।अब सवाल यह है कि लंबे समय से उठ रही मांग पर आबकारी विभाग और जनप्रतिनिधि कब ठोस निर्णय लेंगे? स्थानीय लोग आश्वासनों के बजाय दुकान के स्थानांतरण को लेकर समयबद्ध कार्रवाई चाहते हैं।




