जिला पंचायत सीईओ ने जांच कर कार्रवाई का दिया भरोसा..
Korbavani.com। स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्राम पंचायत जामबहार के आश्रित गांव रोगबहरी में करीब 49 लाख रुपये की लागत से निर्माणाधीन फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (FSTP) की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। निर्माण की ढलाई में दरारें और खामियां होने तथा उन्हें प्लास्टर से ढकने के आरोप सामने आए हैं। मामले ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, आरोपों की पुष्टि तकनीकी जांच के बाद ही हो सकेगी।जिले के पांचों विकासखंडों में बनाए जा रहे FSTP का उद्देश्य सेप्टिक टैंकों से निकलने वाले मल-मिश्रित अपशिष्ट का वैज्ञानिक तरीके से उपचार करना है। ऐसे महत्वपूर्ण संयंत्र के निर्माण में तकनीकी मानकों और मजबूती का पालन जरूरी है। रोगबहरी में निर्माण की स्थिति को लेकर उठे सवालों के बीच अब कार्य की गुणवत्ता का निष्पक्ष परीक्षण आवश्यक माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत जामबहार में पंचायत एजेंसी के माध्यम से निर्माण कराया जा रहा है। कार्य का ठेका पाली निवासी सत्यनारायण पैकरा को दिए जाने की बात सामने आई है। निर्माण स्थल पर ढलाई और प्लास्टर कार्य को लेकर उठाई गई आपत्तियों के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि काम स्वीकृत डिजाइन और तकनीकी प्राक्कलन के अनुरूप हो रहा है या नहीं। तकनीकी जांच से स्पष्ट होगी निर्माण की स्थिति- मामले में केवल सतही निरीक्षण के बजाय ढलाई की मजबूती, निर्माण सामग्री और तकनीकी मानकों की जांच जरूरी है। आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञों से परीक्षण कराकर कमियों का आकलन किया जाना चाहिए, ताकि निर्माण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।जिला पंचायत सीईओ प्रतीक जैन ने मामले की जांच कराने और गड़बड़ी पाए जाने पर कार्रवाई का भरोसा दिया है। अब निगाहें जांच की निष्पक्षता और उसके निष्कर्षों पर टिकी हैं। यदि निर्माण में निर्धारित मानकों की अनदेखी सामने आती है, तो जिम्मेदारी तय करने के साथ नियमानुसार सुधार भी जरूरी होगा। करीब 49 लाख रुपये की लागत वाले इस संयंत्र की गुणवत्ता सुनिश्चित करना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है।




