Korbavani.com। रजगामार चौकी क्षेत्र में सात वर्षीय मासूम बच्ची की हत्या के मामले में पुलिस को अहम सफलता मिली है। चार दिनों से लापता बच्ची का शव मिलने के बाद फरार हुए मुख्य संदेही अमित चौहान को पुलिस ने घटनास्थल से करीब 60 किलोमीटर दूर बांगो के जंगलों से गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक पूछताछ में उसके द्वारा हत्या की वारदात स्वीकार करने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, मामले से जुड़े सभी तथ्यों और घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि पुलिस के विस्तृत खुलासे के बाद ही हो सकेगी।
शव मिलने के बाद गांव छोड़कर भागा संदेही- सात वर्षीय बच्ची के लापता होने के बाद परिजन उसकी तलाश में जुटे थे। शिकायत मिलने पर पुलिस ने भी खोजबीन शुरू की, लेकिन चौथे दिन मासूम का शव बरामद होने से इलाके में सनसनी फैल गई। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच तेज कर दी और संदेह के आधार पर अमित चौहान की गतिविधियों पर नजर रखी। बताया जा रहा है कि बच्ची का शव मिलने के बाद संदेही गांव से फरार हो गया। इसके बाद पुलिस की विशेष टीम ने तकनीकी इनपुट और मुखबिरों से मिली जानकारी के आधार पर उसकी तलाश शुरू की। आखिरकार बांगो के वन क्षेत्र में दबिश देकर उसे हिरासत में ले लिया गया।
रिश्तेदार के घर विवाद की जानकारी भी जांच के दायरे में– मामले से जुड़ी प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, वारदात से पहले आरोपी रजगामार में अपनी एक महिला रिश्तेदार के घर गया था, जहां कथित तौर पर उसकी बहस हुई थी। इसके बाद बच्ची के साथ अपराध किए जाने और हत्या के बाद दोबारा उसी घर लौटकर रात बिताने की बात भी सामने आई है। पुलिस इन जानकारियों की पुष्टि करने के साथ घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। मासूम के साथ यौन हिंसा किए जाने की आशंका से जुड़ी जानकारी भी जांच का गंभीर पहलू है। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की आधिकारिक पुष्टि के बिना इन तथ्यों को अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं माना जा सकता।
आधिकारिक खुलासे पर टिकी नजरें- पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर वारदात के पीछे की वजह, घटनास्थल तक पहुंचने के घटनाक्रम और अन्य संभावित साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है। मामले में सामने आए तथ्यों की पुष्टि के लिए फोरेंसिक साक्ष्य और पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी महत्वपूर्ण होंगे।पुलिस की प्रस्तावित प्रेस कॉन्फ्रेंस में गिरफ्तारी, अपराध के घटनाक्रम और जांच से जुड़े अन्य पहलुओं का विस्तृत खुलासा किए जाने की संभावना है। पूरे क्षेत्र की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि मासूम की मौत से जुड़े सवालों के जवाब जांच में किस तरह सामने आते हैं।




