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हिंदी भवन,नई दिल्ली में 12 अप्रैल 2025 को ‘ अवंतिका नेशनल प्रिंसिपल अवार्ड ‘ से नवाजे जाएंगे इंडस पब्लिक स्कूल, दीपका के प्राचार्य डॉ. संजय गुप्ता …

Korbavani.com- प्रधानाचार्य या प्रधानाध्यापक एक विद्यालय का प्रमुख होता है जिसका कार्य विभाजन के समग्र उद्देश्यों और व्यक्तिगत छात्रों की आवश्यकताओं को पूर्ण करने में विद्यालयों का समर्थन करना और सहायता करना है। प्रधानाध्यापक की भूमिका विद्यालय के भीतर नेतृत्व, निर्देशन और समन्वय प्रदान करना है।वास्तव में, वह शैक्षणिक और प्रशासनिक दोनों ही दृष्टि से विद्यालय का मुखिया होता है। प्राचार्य किसी विशेष विद्यालय में शिक्षकों का मुखिया होता है। वह प्रमुख पद पर होता है और विभिन्न कार्यक्रमों की योजना, समन्वय और आयोजन करता है। वह विद्यालय में अनुशासन का उचित रखरखाव सुनिश्चित करता है ।मनुष्य के जीवन में जितना महत्त्व भोजन, कपड़े, हवा और पानी का है, उससे कहीं अधिक महत्त्व शिक्षा का है इसीलिए हमेशा ये ही कहा जाता है कि शिक्षा का मानव जीवन में बहुत महत्त्व है। शिक्षा ही एक ऐसा माध्यम है जिससे मनुष्य में ज्ञान का प्रसार होता है। इंसान की बुद्धि का विकास शिक्षा अर्जित करने से ही होता है। शिक्षा मानव जीवन की एक महत्त्वपूर्ण इकाई है। शिक्षा न हो तो मनुष्य के जीवन की कल्पना भी मुश्किल है। शिक्षा ही हमें आगे कुछ करने के लिए आवश्यक होती हैनेतृत्व शब्द भले ही पढ़ने में आसान लगे परंतु इस शब्द का महत्व वही बता सकता है जिसने किसी जिम्मेदारी को बड़ी कुशलता से निभाया हो।यदि हमें नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दी जाती है चाहे वह किसी भी क्षेत्र का हो तो हमारी सर्वप्रथम प्राथमिकता उसे पूरी ईमानदारी से वहां करने की होती है।ईश्वर हर किसी को इस गुण से नहीं नवाजता है। इतिहास गवाह है की जिसे भी यदि यह अवसर मिला और उसने यदि पूरी शिद्दत से अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन किया तो ऐसे नेतृत्व कर्ताओं का नाम हमेशा के लिए याद किया जाता रहा है ।रही बात विद्यालय जैसी पवित्र व चुनौतियों से भरे संस्था के नेतृत्व की तो इस कार्य को वही बखूबी कर सकता है जिसमें धैर्य, कुशलता, अनुभव, ज्ञान, जिम्मेदारी, ईमानदारी, सामंजस्य, अनुशासन तथा दूरदृष्टि जैसे गुण हों। विद्यालय का संचालन एक ऐसा विशेष कार्य हैं जिसमें अथक परिश्रम एवं कुशल अनुभव की आवश्यकता होती है।विद्यालय में सभी कर्मचारियों के साथ तालमेल कायम रखते हुए विद्यार्थियों के उज्जवल भविष्य के लिए मार्ग प्रसस्त करने का कार्य केवल वही प्राचार्य कर सकता है जिसमें ज्ञान; अनुभव; धैर्य एवं प्रबंधकीय गुण मौजूद हों। *शिक्षा के क्षेत्र में अपना सर्वस्व न्योछावर कर स्कूल एवं विद्यार्थियो के उज्जवल भविष्य के कार्य करना विद्यालय* संचालक का परम दायित्व होता है। प्राचार्य जो अपने अनुभव एवं कार्य कुशलता से विद्यालय को तरक्की के राह पर ले जाता है।

ऐसे ही ऊर्जावान एवं कर्मठ व्यक्तित्व के धनी डॉ. संजय गुप्ता जो कि वर्तमान में इंडस पब्लिक स्कूल में प्राचार्य के रूप में अपनी सेवा दे रहें। इस वर्ष अवंतिका ग्रुप आफ कंटेंपरेरी आर्टिस्ट्स एंड इंटेलेक्चुअल, विजुअल एंड इंस्ट्रूमेंटल द्वारा वर्ष 2025 में शिक्षा के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान ,समर्पण एवं विशिष्ट प्रबंधन के कार्य तथा कुशल संस्था का संचालन करने के लिए डॉक्टर संजय गुप्ता को अवंतिका नेशनल प्रिंसिपल अवार्ड 2025 से सम्मांनित किया जा रहा है। विगत 46 वर्षों से शिक्षा जगत को अपनी सेवा देते हुए डॉ. संजय गुप्ता (प्राचार्य-इंडस पब्लिक स्कूल दीपका) ने अपना सर्वस्व विद्यार्थियों के लिए समर्पित करते हुए इस मुकाम को हासिल किया है। डॉ. संजय गुप्ता को यह सम्मान 12 अप्रैल 2025 को हिंदी भवन,11, विष्णु दिगंबर मार्ग बाल भवन नई दिल्ली में आयोजित भव्य समारोह में प्रदान किया जाएगा। इस कार्यक्रम में विभिन्न शिक्षाविद, लीडर,प्रोफेशनल,इनोवेटर्स जैसे ख्यातिलब्ध व नामचीन हस्ती मौजूद रहेंगे। सभी महान हस्तियों की गरिमामयी उपस्थिति में इंडस पब्लिक स्कूल के प्राचार्य डॉक्टर संजय गुप्ता को अवंतिका नेशनल प्रिंसिपल अवार्ड 2025 से विशेष समारोह में सम्मानित किया जाएगा।इस अवसर पर अपनी अभिव्यक्ति जाहिर करते हुए डॉ. संजय गुप्ता ने कहा कि मैं अवंतिका ग्रुप एवं उसकी टीम को दिल से धन्यवाद देता हूं,जिन्होंने मुझे इस योग्य समझा। मेरे जीवन का एक ही उद्देश्य है कि मैं अंतिम सांस तक शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करता रहूंगा। विद्यालय का संचालन एवं बच्चों के भविष्य निर्माण हेतु अथवा नये आवाम तलाशना निःसंदेह काफी कठिन कार्य है। परंतु मैं अपनी पूरी निष्ठा एवं लगन से इस कार्य में लगा रहुँगा। मेरी जिंदगी का एक ही उद्देश्य है सीखना एवं सिखाना एवं विद्यार्थियों को सतत रूप से आगे बढ़ने हेतु प्रेरित करना। आजीवन जनसामान्य हेतु तथा विद्यालय के बच्चों सहित कार्यरत प्रत्येक कर्मचारी हेतु समर्पण भाव से कार्य करता रहूंगा।संस्था के संचालन में आने वाली प्रत्येक चुनौतियों के लिए भी तैयार रहूंगा तथा बेहतर से भी बेहतर करने की कोशिश करता रहूंगा। अपने कार्य से स्वयं और अन्य को संतुष्ट करना मेरा उद्देश्य है। इस क्षणभंगुर जीवन में समाज के लिए कुछ असाधारण कर परोपकार आ कार्य करना भी लक्ष्य है लेकिन पहली प्राथमिकता शिक्षा है।जीवन भर कुछ नया करना और नया सीखकर अन्य को भी उस ज्ञान के प्रकाश से आलोकित करना लक्ष्य है।

डॉ. संजय गुप्ता के अवंतिका नेशनल प्रिंसिपल अवार्ड* प्राप्त होने पर इंडस विद्यालय परिवार अत्यंत गौरवान्वित महसूस कर रहा है। ध्यातव्य है कि अवंतिका नेशनल प्रिंसिपल अवार्ड असाधारण सामाजिक कार्य ,शिक्षा के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान, भारतीय कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में योगदान सहित विभिन्न मापदंडों पर खडा उतरने पर दिया जाता है।इससे पहले भी डॉ. संजय गुप्ता विभिन्न सम्मान से नवाजे गए हैं। साथ ही अनेक सामाजिक संस्थाओं द्वारा हर वर्ष समाज एवं शिक्षा के क्षेत्र में डॉ. संजय गुप्ता को सम्मानित किया जाता रहा है।

Kush Sharma

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