कोरबा

सीसीए एक्टिविटी के अंतर्गत कक्षा पहली एवं दूसरी के बच्चों ने कुकिंग विदाउट फायर में दिखाई अपनी प्रतिभा, बनाए स्वादिष्ट एवं चटपटे व्यंजन।

नन्हे-मुन्ने बच्चों के साथ अभिभावकों ने भी शिरकत की कुकिंग विदाउट फायर प्रतियोगिता में।

Korbavani- इंडस पब्लिक स्कूल दीपिका में सीसीए एक्टिविटी के अंतर्गत कुकिंग विदाउट फायर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में बच्चों ने सा अभिभावक बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। बच्चों ने एक से बढ़कर एक स्वादिष्ट एवं चटपटे व्यंजनों को तैयार किया एवं उपस्थित अभिभावकों एवं अतिथियों तथा जजेस ने लुत्फ उठाया। अलग-अलग टेबल में अलग-अलग आकर्षक एवं सजे हुए स्वादिष्ट व्यंजन देखते ही बनते थे। बच्चों ने स्वादिष्ट सलाद सैंडविच गोलगप्पे एवं भेल बनाकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया । सीसीए एक्टिविटी के अंतर्गत आयोजित कुकिंग विदाउट फायर प्रतियोगिता नाज़नीन सिद्दीकी एवं अंकिता रजक के दिशा निर्देशन में संपन्न हुआ। इस प्रतियोगिता में निर्णायक की भूमिका रंजीत कौर, सोमा चौधरी वर्णन एवं प्रज्ञा शुक्ला ने निभाया। अच्छी खासी संख्या में अभिभावकों ने इस प्रतियोगिता में शिरकत की एवं या प्रतियोगिता सफल रही। बच्चों को जीवन शैली में सात्विक अन्न ग्रहण के लिए किया प्रेरित किया गया। रंजीत कौर ने कहा कि 21 वीं सदी का भारत बदलाओ तो होने चाहिए थे सकारात्मक मगर हुवे नकारात्मक अगर बात करें भोजन की तो गौर फरमाइए हमारे स्वास्थ्य के लिये भोजन की भूमिका कितनी अहम है। समय के साथ देखा देखी लोगों की फूड हैबिट बदलती गई। नेचरल चीजों की जगह, पैकेज्ड, स्टोर फूड ने ले लिया, मिट्टी के बर्तनों की जगह एल्युमिनियम या लोहे के बर्तनों ने ले लिया, कच्चे तेल की जगह रिफाइंड आयल ने ले लिया, हरे आयुर्वेदिक मसालों की जगह सूखे पिसे हुवे पैकेज्ड व स्टोर्ड मसालों ने ले लिया, जो भारत पवित्रता के लिए सात्विक अन्न, वेजिटेरिअन के लिये जाना जाता था उसकी जगह, वहां मिट मटन चिकन मांस खाना आम हो गया, जो भारत सात्विक अन्न के लिये जाना जाता था वह कब तामसिक भोजन लेने लगा समय के साथ परिवर्तन सभी ओर हुवा पर अफसोस कि परिवर्तन हमारे स्वास्थ्य के लिये सकारात्मक नहीं बल्कि नकारात्मक हुवा। सोमा चौधरी ने कहा किआज कोई भी अन्न में स्वच्छता, पवित्रता नहीं रही ।मिलावट से अन्न भी दूषित हो चला। आज से 3 से 4 दशक पूर्व पर गौर फरमाएं तो वह प्रकृति से मिली चीजों को उसी तरह ग्रहण करते थे जिस तरह प्रकृति ने दिया होता था। पर आज लोग उन चीजों को आग में मिर्च मसाले तेल के साथ इतना पकाकर खाने लगे कि उसके अंदर के पोषक तत्व ही हो गए व बिना पोषक तत्वों के भोजन में ताकत नहीं होने से लोगों को बीमारियां भी घेरने लगे।इंडस पब्लिक स्कूल के प्राचार्य डॉ. संजय गुप्ता ने कहा कि मेटल की कढ़ाई की जगह मिठ्ठी के बर्तन में खाना पकाने से उसके स्वाद बने रहते हैं । जब हम मेटल के बर्तन में खाना पकाते हैं। तो मेटल खाने में अब्सॉर्ब होकर हमारे शरीर मे जाकर दुस्प्रभाव डालता है। जिससे हमारा शरीर रोगग्रस्त होने लगता है।हमें अपने डेली फूड चार्ट में कम से कम मिर्च मसाले उपयोग करने चाहिए। पिसे हुवे धनिये के पाउडर की जगह हरि धनियां की पत्ती, लाल मिर्च पाउडर की जगह हरी मिर्च, नमक की जगह सेंधा नमक सब्जियों को आग में लिमिटेड समय तक ही पकाना चाहिए, रिफाइंड ऑयल की जगह कच्चे तेल का उपयोग करना चाहिए चूंकि रिफाइंड आयल से सारे पोषक तत्व निकल जाते हैं। और लोगों ने जाना प्रकृति ने जिन चीजों को जैसे दिया है उसमें ज्यादा बदलाओ ना करते हुवे उसे उसी रूप में ग्रहण करने से उसकी महत्ता बनी रहती है। आज हमें बच्चों को ज्यादा से ज्यादा स्वास्थ्यवर्धक चीजें खाने के लिए प्रेरित करने चाहिए जंग फूड हमेशा से स्वास्थ्य के लिए हानिकारक रहा है।

Kush Sharma

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