Korbavani.com। नगर निगम की ओर से आयोजित पत्रकार वार्ता में महापौर संजू देवी राजपूत ने अपने 16 माह के कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाते हुए शहर में 537 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का दावा किया। उन्होंने कहा कि निगम के 67 वार्डों में सड़क, नाली, पेयजल, बिजली सहित बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सैकड़ों कार्य स्वीकृत हुए हैं, जिनमें कई पूरे हो चुके हैं, कई निर्माणाधीन हैं और शेष कार्य जल्द शुरू किए जाएंगे। महापौर ने बताया कि 537 करोड़ रुपये की लागत वाले विकास कार्यों में 76 कार्य पूर्ण हो चुके हैं, 149 कार्य प्रगति पर हैं, जबकि 209 कार्य शीघ्र प्रारंभ होंगे। इसके अलावा 15वें वित्त आयोग के तहत 36 करोड़ रुपये की लागत के 115 कार्य टेंडर प्रक्रिया में हैं। लगभग 30 करोड़ रुपये की लागत से जैन चौक से आईटीआई चौक और कोसाबाड़ी चौक तक गौरव पथ निर्माण तथा शहर की प्रमुख सड़कों के डामरीकरण की भी जानकारी दी गई। हालांकि, पत्रकार वार्ता के बाद राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है कि विकास कार्यों का श्रेय किसे मिलना चाहिए। चर्चा इस बात की भी है कि जिन योजनाओं को राज्य सरकार की मंजूरी और मंत्री स्तर की पहल से गति मिली, उनकी घोषणा और उपलब्धियों की प्रस्तुति ऐसे समय में की गई, जब विधानसभा का सत्र चल रहा है और कोरबा विधायक एवं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन विधानसभा की कार्यवाही में व्यस्त हैं। राजनीतिक हलकों में यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि ये उपलब्धियां विधानसभा सत्र समाप्त होने के बाद भी साझा की जा सकती थीं, तो इतनी जल्दबाजी की आवश्यकता क्यों महसूस हुई। इसे लेकर विभिन्न स्तरों पर अलग-अलग तरह की राजनीतिक व्याख्याएं सामने आ रही हैं। चर्चा यह भी है कि कोरबा जिले में अनेक विकास परियोजनाओं को स्वीकृति दिलाने और शासन स्तर पर आगे बढ़ाने में उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन की सक्रिय भूमिका रही है। ऐसे में उपलब्धियों की प्रस्तुति के दौरान उनकी भूमिका का अपेक्षाकृत कम उल्लेख होने से राजनीतिक हलकों में इसे लेकर सवाल उठने लगे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नगर निगम के विकास कार्य किसी एक व्यक्ति के प्रयास का परिणाम नहीं होते, बल्कि राज्य सरकार, संबंधित विभागों, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामूहिक समन्वय से योजनाएं धरातल पर उतरती हैं। इसलिए किसी भी विकास कार्य का संपूर्ण श्रेय एक ही पक्ष द्वारा लेने की धारणा स्वाभाविक रूप से बहस का विषय बन सकती है। फिलहाल, यह मामला राजनीतिक चर्चा का केंद्र बना हुआ है। एक ओर महापौर अपनी उपलब्धियों को जनता के सामने रखने की बात कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक हलकों में यह सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या विकास कार्यों के श्रेय को लेकर भविष्य की राजनीतिक रणनीति तैयार की जा रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष के भीतर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है, इस पर भी सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
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