Korbavani.com। औद्योगिक सुरक्षा के क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और नेतृत्व क्षमता का उदाहरण अब बालको में भी देखने को मिल रहा है। कंपनी के सेंट्रल सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर (सीएसओसी) का संचालन अब पूरी तरह महिला कर्मचारियों की टीम कर रही है। ‘शी-एसओसी’ (सिक्योरिटी हार्मनी एंड एक्सीलेंस) के रूप में विकसित यह पहल सुरक्षा व्यवस्था में महिलाओं की दक्षता, तकनीकी कौशल और नेतृत्व क्षमता को नई पहचान दे रही है।बालको का सीएसओसी कंपनी की सुरक्षा व्यवस्था का मुख्य नियंत्रण केंद्र है, जो 24 घंटे और सप्ताह के सातों दिन लगातार संचालित होता है। संयंत्र परिसर में लगे सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों की निगरानी, सुरक्षा अलर्ट का विश्लेषण, आपात स्थिति में त्वरित समन्वय, सुरक्षा टीमों को आवश्यक दिशा-निर्देश देना तथा सुरक्षा संचालन से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों में सहयोग जैसी अहम जिम्मेदारियां अब महिला कर्मचारियों की टीम संभाल रही है।औद्योगिक सुरक्षा का स्वरूप लगातार तकनीक आधारित होता जा रहा है। ऐसे में सतर्कता, तार्किक सोच, सूक्ष्म निरीक्षण, त्वरित निर्णय क्षमता और प्रभावी संवाद जैसे गुण सुरक्षा संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बालको का मानना है कि महिलाओं की भागीदारी इन सभी पहलुओं को और मजबूत बनाती है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था अधिक प्रभावी और संतुलित होती है।शी-एसओसी की प्रभारी वर्षा द्विवेदी के अनुसार, संगठन ने उन्हें सुरक्षा संचालन का नेतृत्व करने का अवसर और विश्वास दिया है। आधुनिक सुरक्षा प्रणालियों, नई तकनीकों और नियमित प्रशिक्षण से उनका आत्मविश्वास लगातार बढ़ा है। उनका कहना है कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करने से निर्णय लेने की क्षमता मजबूत हुई है और महिला सशक्तिकरण की सोच ने उन्हें नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया है।टीम की सदस्य रेखा श्रीवास्तव का कहना है कि सुरक्षा केवल शारीरिक शक्ति का विषय नहीं है, बल्कि सतर्कता, अनुशासन, ईमानदारी, प्रभावी संवाद और सही समय पर सही निर्णय लेने की क्षमता इस क्षेत्र की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उनका मानना है कि महिलाओं ने अपने कौशल, प्रशिक्षण और समर्पण से यह साबित किया है कि किसी भी जिम्मेदारी को सफलतापूर्वक निभाने की क्षमता योग्यता और मेहनत पर निर्भर करती है, न कि लिंग पर।वहीं पूजा टंडन के अनुसार, सुरक्षा संचालन के क्षेत्र में हर दिन नई चुनौतियां सीखने और स्वयं को बेहतर बनाने का अवसर देती हैं। उनका कहना है कि तकनीक आधारित सुरक्षा प्रणाली के साथ कार्य करने का अनुभव उनके पेशेवर जीवन को समृद्ध बना रहा है। किसी आपात स्थिति में समय पर लिया गया निर्णय जब बड़े जोखिम को टाल देता है, तब अपने कार्य की वास्तविक सार्थकता का एहसास होता है।बालको का ‘शी-एसओसी’ यह दर्शाता है कि समान अवसर, विविधता और योग्यता आधारित कार्य संस्कृति किसी भी संगठन को अधिक सक्षम बना सकती है। महिलाओं के नेतृत्व में संचालित यह सुरक्षा नियंत्रण केंद्र न केवल उनकी क्षमता और पेशेवर दक्षता का परिचायक है, बल्कि यह भी साबित करता है कि उचित अवसर, प्रशिक्षण और विश्वास मिलने पर महिलाएं औद्योगिक सुरक्षा जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में भी प्रभावी नेतृत्व निभा सकती हैं।
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