करतला जनपद में सचिवों के तबादले के बाद आदेश पालन पर उठे सवाल, जुनवानी पंचायत में नए सचिव को अब तक नहीं मिली जिम्मेदारी…
Korbavani.com। करतला जनपद क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में सचिवों के फेरबदल के बाद अब प्रशासनिक आदेश के पालन को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। पंचायत सचिवों की लगातार शिकायतों के बाद नवपदस्थ जिला सीईओ प्रतीक जैन (IAS) ने कई सचिवों का स्थानांतरण करते हुए नई पंचायतों में पदस्थापना की है। कुछ सचिवों को जनपद कार्यालय में अटैच भी किया गया है। लेकिन आदेश जारी होने के करीब दो सप्ताह बाद भी कुछ पंचायतों में नए सचिवों को प्रभार नहीं मिलने की बात सामने आ रही है। मामला ग्राम पंचायत जुनवानी का है। यहां पूर्व में पदस्थ सचिव लखन लाल जायसवाल को लेकर ग्रामीणों द्वारा लगातार शिकायतें किए जाने की बात सामने आई थी। शिकायतों के बाद मामले की जांच भी हुई। इसके बाद पंचायतों के सुचारू संचालन के लिए सचिवों के प्रभार में फेरबदल किया गया। जारी आदेश के मुताबिक लखन लाल जायसवाल को करतला जनपद कार्यालय भेजा गया, जबकि प्रमोद कुमार राठिया को ग्राम पंचायत जुनवानी की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके बावजूद ग्रामीणों का कहना है कि आदेश जारी होने के करीब दो सप्ताह बाद भी नए सचिव को पंचायत का विधिवत प्रभार नहीं मिल पाया है।
आदेश में लिखा—‘तत्काल प्रभावशील’, फिर प्रभार में देरी क्यों?27 अगस्त 2026 को जारी आदेश में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि ग्राम पंचायत के सुचारू संचालन के लिए सचिव को आगामी आदेश तक जिम्मेदारी सौंपी जाती है और “यह आदेश तत्काल प्रभावशील होगा।”ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है, तो फिर संबंधित पंचायत में नए सचिव को अब तक प्रभार क्यों नहीं सौंपा गया? ग्रामीणों के अनुसार सचिव का प्रभार स्पष्ट नहीं होने से पंचायत के रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं। पीएम आवास, जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र, पेंशन समेत शासन की विभिन्न योजनाओं से जुड़े कार्यों के लिए ग्रामीणों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
कई पंचायतों में फेरबदल, अतिरिक्त प्रभार भी तय– प्रशासनिक फेरबदल के तहत संतोष कुमार दीवान को सालीयाभाठा से ढोढातराई, प्रमोद कुमार राठिया को कनकी से जुनवानी तथा लखन लाल जायसवाल को करतला जनपद भेजे जाने का आदेश जारी किया गया है। वहीं सालीयाभाठा का अतिरिक्त प्रभार ओमप्रकाश भास्कर और कनकी का अतिरिक्त प्रभार खिलेश कुमार पटेल को सौंपा गया है।लेकिन अब ग्राम पंचायत के ग्रामीणों का सवाल है कि जब नए और अतिरिक्त प्रभार वाले सचिवों की जिम्मेदारी प्रशासन ने तय कर दी है, तो जमीन पर उन्हें वास्तविक प्रभार कब मिलेगा?
प्रभार की उलझन में अटके ग्रामीणों के काम– ग्राम पंचायत स्तर पर सचिव शासन की योजनाओं और ग्रामीणों से जुड़े विभिन्न शासकीय कार्यों के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में सचिव का प्रभार स्पष्ट नहीं होने की स्थिति का सीधा असर ग्रामीणों पर पड़ने की बात कही जा रही है। ग्रामीणों में अब सवाल उठ रहा है कि जब प्रशासन ने सचिवों के फेरबदल का आदेश जारी कर दिया है, तो उसका पालन आखिर कब होगा? क्या संबंधित पंचायतों में नए सचिवों को तत्काल प्रभार सौंपा जाएगा और लंबे समय से प्रभावित कार्यों को गति मिलेगी?
सबसे बड़ा सवाल– आदेश का पालन नहीं हुआ तो जिम्मेदार कौन?नवपदस्थ जिला सीईओ द्वारा जारी स्पष्ट आदेश के बावजूद यदि संबंधित पंचायत में प्रभार हस्तांतरण नहीं हुआ है, तो आखिर इसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी? क्या प्रशासन इस मामले में जांच कराएगा या फिर आदेश के पालन में हो रही देरी को लेकर संबंधित जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी? फिलहाल, सचिवों के फेरबदल के बाद सामने आई यह स्थिति करतला जनपद की प्रशासनिक कार्यप्रणाली और आदेश के जमीनी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर रही है।




