Korbavani.com। जिले के पोड़ी-उपरोड़ा जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत गुरसिया एक बार फिर निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं को लेकर चर्चा में है। इस बार मामला जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) मद से स्वीकृत आंगनबाड़ी भवन और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) भवन के निर्माण से जुड़ा हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि दोनों निर्माण कार्य लंबे समय से अधूरे पड़े हैं, जबकि स्वीकृत राशि का एक हिस्सा पहले ही आहरित किया जा चुका है। इससे पंचायत के कार्यों की गुणवत्ता और वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं। जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत गुरसिया में डीएमएफ मद से आंगनबाड़ी केंद्र भवन और पीडीएस भवन निर्माण की स्वीकृति मिली थी। इन कार्यों का क्रियान्वयन पंचायत स्तर पर कराया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य की गति बेहद धीमी है और कई स्थानों पर कार्य लगभग ठप पड़ा हुआ दिखाई दे रहा है। आरोप है कि अब तक हुए निर्माण की तुलना में खर्च की गई राशि अधिक प्रतीत होती है। ग्रामीणों, पंचों का दावा है कि निर्माण कार्य के लिए स्वीकृत राशि का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा सरपंच और सचिव द्वारा आहरित कर लिया गया है। हालांकि मौके पर निर्माण कार्य की स्थिति को देखकर ग्रामीणों का कहना है कि राशि के अनुरूप काम नजर नहीं आ रहा है। यही कारण है कि अब ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज कर दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पंचायत में विकास कार्यों को लेकर पहले भी कई बार शिकायतें सामने आ चुकी हैं। उनका आरोप है कि गुरसिया पंचायत में विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं, लेकिन जांच के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और वित्तीय पहलुओं की जांच नहीं हुई तो शासकीय राशि के दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी मुद्दे को लेकर ग्राम पंचायत के पंचों, उपसरपंच तथा अन्य ग्रामीणों ने बीते सोमवार को आयोजित कलेक्टर जनदर्शन में भी शिकायत प्रस्तुत की है। शिकायत में निर्माण कार्यों की तकनीकी जांच, भुगतान प्रक्रिया की समीक्षा तथा जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की भूमिका की जांच की मांग की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि शासन की योजनाओं का लाभ आम लोगों तक पहुंचाने के लिए स्वीकृत किए गए भवन आज भी अधूरे हैं, जिससे बच्चों और हितग्राहियों को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। उन्होंने प्रशासन से मामले में शीघ्र हस्तक्षेप कर जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।इस संबंध में ग्राम पंचायत के वर्तमान सरपंच का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। सरपंच का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। फिलहाल ग्रामीणों की शिकायत के बाद अब सबकी नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।
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