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गरीबी की मार और तंत्र की बेरुख़ी- जन्म प्रमाण पत्र के लिए चावल बेचने को मजबूर हुई माँ, देखें वीडियो..

ग्रामीण माँ का वीडियो वायरल, प्रशासन हरकत में…

Korbavani.com – एक जन्म प्रमाण पत्र के लिए कितनी बार चक्कर काटना पड़ा, और जब बना, तो पैसे भी देने पड़े- यह दर्दभरा बयान था अमीषा धनवार का, जो इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में अपने आँसुओं के साथ भ्रष्ट तंत्र की कलई खोलती नजर आ रही हैं। ग्राम बंजारी निवासी अमीषा धनवार अपने बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र में नाम सुधार करवाने के लिए महीनों से बंजारी के स्वास्थ्य केंद्र का चक्कर काट रही थीं। आर्थिक रूप से बेहद कमजोर अमीषा के पास नकद पैसे नहीं थे, लिहाज़ा उन्होंने अपने घर का चावल बेचकर 500 रुपये की व्यवस्था की—ताकि अपने बच्चे के अधिकार के लिए रिश्वत दी जा सके। अमीषा का आरोप है कि बंजारी उपस्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ एएनएम द्वारा प्रमाण पत्र के एवज में 200 रुपये और नाम सुधार के लिए 500 रुपये की मांग की गई। वीडियो में अमीषा की पीड़ा स्पष्ट दिखाई देती है, जो यह दर्शाती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में किस तरह गरीबों से अवैध वसूली की जा रही है।

प्रशासन हरकत में, ताला मिला उपस्वास्थ्य केंद्र पर– वीडियो के वायरल होने के बाद पोड़ी उपरोड़ा एसडीएम के मौखिक निर्देश पर नायब तहसीलदार सुमन दास मानिकपुरी ने जांच के लिए स्थल का दौरा किया। दोपहर 2 बजे जब अधिकारी उपस्वास्थ्य केंद्र पहुंचे, तो वहाँ ताला लटका हुआ मिला। बाद में वे अमीषा के घर पहुँचे, जहाँ उन्होंने बताया कि ऐसी वसूली पहले भी कई बार हो चुकी है।

ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों ने भी लगाए आरोप– जांच के दौरान बुलाए गए ग्राम सरपंच, उपसरपंच और अन्य ग्रामीणों ने भी पुष्टि की कि यह पहली बार नहीं है। उन्होंने बताया कि संबंधित एएनएम जानबूझकर प्रमाण पत्र में त्रुटियाँ करती है और फिर पैसे की माँग करती है। डर और दबाव के कारण अब तक कोई खुलकर सामने नहीं आया था। ग्रामीणों ने बताया कि जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ, आरोपी कर्मचारी घर से फरार हो गई।

प्रशासन की परीक्षा की घड़ी– यह घटना न केवल एक गरीब माँ की पीड़ा को उजागर करती है, बल्कि यह सवाल भी खड़े करती है कि आखिर कब तक गरीबों का शोषण इसी तरह होता रहेगा? स्वास्थ्य और नागरिक सेवाओं से जुड़ी ऐसी घटनाएँ शासन-प्रशासन की साख पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं। अब यह देखना अहम होगा कि कोरबा जिला प्रशासन इस गंभीर मामले पर क्या ठोस कार्रवाई करता है। क्या आरोपी कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई होगी या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दब जाएगा?

Kush Sharma

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