Korbavani.com। जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन कई जगहों पर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता गंभीर सवालों के घेरे में है। ऐसा ही मामला पोड़ी उपरोड़ा क्षेत्र की ग्राम पंचायत पाथा में सामने आया है, जहां आयोजित ग्रामसभा में नल-जल योजना के तहत किए जा रहे निर्माण कार्यों में कथित अनियमितता और भ्रष्टाचार का मुद्दा प्रमुखता से उठा। ग्रामसभा में जनपद सदस्य अंजू भोला गोस्वामी, सरपंच सुखसय मांझवार, उपसरपंच, पंचों सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे। बैठक के दौरान ग्रामीणों ने जल जीवन मिशन के अंतर्गत निर्मित पानी टंकी परिसर में बनाए जा रहे अहाता (बाउंड्रीवाल) की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए। ग्रामीणों का कहना था कि निर्माण कार्य में मानकों की अनदेखी की जा रही है, जिसके कारण थोड़ी सी बारिश में ही दीवारों और नींव की स्थिति कमजोर पड़ती दिखाई देने लगी है।ग्रामीणों द्वारा उपलब्ध कराए गए फोटो और वीडियो में भी निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े होते नजर आ रहे हैं। तस्वीरों में स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि अहाता निर्माण में उपयोग की गई सामग्री और निर्माण तकनीक अपेक्षित स्तर की नहीं है। बारिश के बीच निर्माण स्थल की स्थिति और अधिक चिंताजनक बन गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते जांच और सुधार नहीं किया गया तो भविष्य में बड़ा हादसा होने से इनकार नहीं किया जा सकता। ग्रामसभा में मौजूद लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण कार्य की निगरानी करने वाले अधिकारियों और तकनीकी अमले की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। सवाल उठ रहे हैं कि जब निर्माण कार्य सरकारी राशि से कराया जा रहा है तो गुणवत्ता की जांच और निरीक्षण की जिम्मेदारी निभाने वाले इंजीनियरों तथा विभागीय अधिकारियों ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की।जनपद सदस्य अंजू भोला गोस्वामी ने ग्रामसभा में कहा कि यह कोई नया मामला नहीं है। उन्होंने बताया कि निर्माण कार्य में गड़बड़ी की शिकायत पहले भी संबंधित विभाग को की जा चुकी है, लेकिन शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया। उनका कहना था कि विभागीय उदासीनता के कारण ही ठेकेदारों के हौसले बुलंद हैं और निर्माण कार्यों में मनमानी जारी है।उन्होंने यह भी याद दिलाया कि इससे पहले भी पोड़ी उपरोड़ा क्षेत्र में नल-जल योजना के तहत निर्मित एक पानी टंकी का अहाता धंसकर गिर चुका है। उस घटना के बाद भी यदि सबक नहीं लिया गया तो यह शासन की महत्वाकांक्षी योजना के लिए गंभीर चिंता का विषय है। ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बनाई जा रही योजनाएं यदि शुरुआती बारिश भी नहीं झेल पा रही हैं तो निर्माण कार्य की गुणवत्ता का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। ग्रामसभा में उठे इस मुद्दे के बाद अब लोगों की निगाहें विभागीय कार्रवाई पर टिकी हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए, दोषी ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो तथा गुणवत्ताहीन निर्माण को तत्काल दुरुस्त कराया जाए। अन्यथा जल जीवन मिशन जैसी जनहितकारी योजना भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आएगी।
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