3 किमी सीसी रोड और 800 मीटर नाली निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल, भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच की उठी मांग...
Korbavani.com। नगर निगम कोरबा के वार्ड क्रमांक 3 में करीब 2 करोड़ रुपये की लागत से कराए जा रहे सीसी रोड और नाली निर्माण कार्य को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए कांग्रेसियों ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शन किया और प्रतीकात्मक रूप से झाड़ू चलाकर विरोध जताया। खास बात यह है कि संबंधित वार्ड महापौर संजू देवी राजपूत का बताया जा रहा है। ऐसे में महापौर के ही वार्ड में निर्माण कार्य को लेकर उठे सवालों ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। जानकारी के अनुसार, वार्ड क्रमांक 3 में लगभग 2 करोड़ रुपये की लागत से करीब 3 किलोमीटर सीसी रोड और 800 मीटर नाली का निर्माण कराया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। विरोध कर रहे कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद निर्माण कार्य में अपेक्षित गुणवत्ता दिखाई नहीं दे रही है। हालांकि, निर्माण में अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोपों की स्वतंत्र जांच होना अभी बाकी है।
महापौर के वार्ड में ही निर्माण पर उठे सवाल- निर्माण कार्य को लेकर नाराजगी जताते हुए कांग्रेसियों ने मौके पर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान झाड़ू चलाकर प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया गया और नगर निगम की कार्यप्रणाली के खिलाफ नारेबाजी की गई। प्रदर्शनकारियों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराने तथा यदि अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश राठौर, नेता प्रतिपक्ष कृपाराम साहू, वार्ड पार्षद रवि सिंह चंदेल सहित अन्य पार्षद और कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे। कांग्रेस नेताओं ने निर्माण कार्य में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और जनता के पैसे का सही उपयोग करने की मांग की। इस दौरान महापौर के विरोध में भी नारे लगाए गए।
जनता के पैसे से निर्माण, गुणवत्ता की जवाबदेही किसकी? करीब 2 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रही सड़क और नाली का उद्देश्य वार्डवासियों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना है। ऐसे में निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवाल स्थानीय नागरिकों के लिए चिंता का विषय हैं। सड़क और नाली जैसे निर्माण कार्यों की मजबूती सीधे आम लोगों की सुविधा से जुड़ी होती है। यदि निर्धारित मानकों का पालन नहीं होता है, तो इसका खामियाजा अंततः जनता को भुगतना पड़ सकता है। स्थानीय नागरिकों के बीच भी यह सवाल उठ रहा है कि जब निर्माण कार्य पर इतनी बड़ी राशि खर्च की जा रही है, तो उसकी गुणवत्ता की निगरानी किस स्तर पर की जा रही है। नागरिकों की मांग है कि निर्माण में इस्तेमाल सामग्री, तकनीकी मानकों और कार्य की वास्तविक स्थिति की जांच की जाए। हालांकि, आरोपों की पुष्टि तकनीकी जांच के बाद ही हो सकेगी।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने की जांच की मांग- जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश राठौर ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनता के पैसे से होने वाले विकास कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता सर्वोपरि होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि संबंधित निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए और गड़बड़ी सामने आने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। वार्ड पार्षद ने कहा कि विकास कार्यों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। वहीं, नगर निगम के संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल, वार्ड क्रमांक 3 में निर्माण की गुणवत्ता को लेकर उठा विवाद नगर निगम की निगरानी व्यवस्था और विकास कार्यों की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर रहा है।




