सिगरेट, बीड़ी, गांजे इत्यादि का धुआं ही हमें शमशान तक पहुंचाती है और यही हमारी चिता के धुएं का कारण बनते हैं – डॉक्टर संजय गुप्ता।
Korbavani.com- धूम्रपान की शुरुआत ज्यादातर किशोरावस्था या किशोरावस्था के आरंभिक दौर में होती है ।धूम्रपान में जोखिम के तत्व और विद्रोह होता है जो कि अक्सर युवा लोगों को आकर्षित करता है। उच्च स्तर के मॉडल और साथियों की उपस्थिति भी धूम्रपान करने को प्रोत्साहित कर सकती है, क्योंकि किशोर वयस्कों की तुलना में अपने साथियों से अधिक प्रभावित होते हैं। इसलिए माता-पिता स्कूल तथा स्वास्थ्य पेशेवर इन लोगों के सिगरेट पीने के प्रयास को रोकने में अक्सर असफल होते हैं। धूम्रपान करने वाले माता-पिता के बच्चों में गैर धूम्रपान करने वाले माता-पिता के बच्चों से धूम्रपान करने की संभावना अधिक होती है। एक अध्ययन में पाया गया है कि माता-पिता के धूम्रपान छोड़ने का संबंध किशोरावस्था में कम धूम्रपान से है सिवाय जब तक दूसरे माता-पिता वर्तमान में धूम्रपान करते हों। एक मौजूदा अध्ययन के परीक्षण में पाया गया है कि धूम्रपान के नियमन के मामले में किशोरावस्था में धूम्रपान का संबंध घर में वयस्कों को धूम्रपान करने की अनुमति से है ।परिणाम बताते हैं कि घर में धूम्रपान संबंधी प्रतिबंधात्मक नीतियां माध्यमिक और उच्च विद्यालय के छात्रों के धूम्रपान की कोशिश की कम संभावना से संबंधित है।तंबाकू के इस विषय में प्रभाव एवं भावी पीढ़ी की इस में संलग्न का से उत्पन्न सामाजिक पारिवारिक एवं राष्ट्रीय खतरे से लोगों को आगाह करने एवं बच्चों को इसकी लत से दूर रखने के उद्देश्य से दीपका स्थित इंडस पब्लिक स्कूल में विश्व धूम्रपान निषेध दिवस पर ऑनलाइन मोड में विभिन्न आयोजन किए गए। इस आयोजन में यह बताने का प्रयास किया गया कि किस प्रकार तंबाकू वनस्पतीय पदार्थ होते हुए भी हमारे लिए जानलेवा है। बच्चों द्वारा एक आकर्षक नाटिका का ऑनलाइन जू ऐप पर आयोजन कर यह दर्शाया गया कि तंबाकू केवल हमारे स्वास्थ्य को ही नहीं अपितु हमारे संस्कारों को भी खत्म कर रहा है ।खैनी ,गुटखा, जर्दा खाकर अनुचित जगहों पर थूकना, गंदगी फैलाना, हमारे संस्कारों को खत्म कर रहा है और हम जैसे कर रहे हैं हमें देखकर बच्चे भी वही सीख रहे हैं ।इस कार्यक्रम में विद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर संजय गुप्ता शिक्षक एवं सभी बच्चों ने तंबाकू पदार्थों का सेवन ना करने और लोगों को भी इसके सेवन से रोकने का संकल्प लिया।विश्व धूम्रपान निषेध दिवस के अवसर पर इंडस पब्लिक स्कूल में बच्चों द्वारा ऑनलाइन बेस्ट फेस पेंटिंग चैलेंज में विभिन्न प्रकार के प्रेरक संदेश देने का प्रयास किया गया। बच्चों ने अपने फेस पर नो टोबैको नो स्मोकिंग इत्यादि विभिन्न प्रकार के प्रेरक पेंटिंग को बनाकर समाज को तंबाकू मुक्त बनाने का संदेश दिया। इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य डॉ संजय गुप्ता ने अपने उद्बोधन में कहा कि चिंता को बनाने के लिए किया गया सिगरेट का सेवन हमें चीता तक पहुंचाता है आज हमारे देश का भविष्य तंबाकू के भयानक प्रभाव में समा चुका है हमें आवश्यक रूप से इस पर प्रतिबंध लगाना चाहिए हमें बच्चों को इस से दूर रखने की पुरजोर कोशिश करनी चाहिए बच्चों के समक्ष भूल से भी किसी भी तंबाकू युक्त पदार्थ का हम सेवन ना करें बच्चों को सही मार्ग पर लाने से पूर्व आवश्यक है कि स्वयं को हम सुधारें। वनस्पति जगत में तरह-तरह के पेड़ पौधे पाए जाते हैं सभी हमारे लिए जीवनदाई अमृत का कार्य करते हैं क्योंकि सभी हमें प्राणवायु ऑक्सीजन देते हैं लेकिन कुछ पेड़ पौधे हमें मौत के मुंह तक भी पहुंचाते हैं जिनके पत्ते, फल- फूल इत्यादि का सेवन हमारे लिए हानिकारक होता है, क्योंकि उसमें निकोटिन होती है जिसकी लत हमें लग जाती है। आज तंबाकू ने लगभग सारे घर को अपने कब्जे में ले रखा है। भले ही उसके सेवन के रूप अलग-अलग हों।बच्चा – बच्चा आज तंबाकू के उत्पादों से परिचित है। आलम यह है कि देश के भविष्य के कहे जाने वाले ये ननिहाल भी इन तंबाकू उत्पादों के सेवन से अछूते नहीं हैं। इससे उनके स्वास्थ्य और संस्कार दोनों को क्षति पहुंच रही है ।शौक और मस्ती के साथ शुरू हुआ तंबाकू का सेवन कब जिंदगी को नष्ट कर देता है, लोगों को पता भी नहीं चलता। यह धीमा जहर है। हमें हर संभव इस से स्वयं को और समाज को बचाने का प्रयास करना चाहिए ।तंबाकू का सेवन वैश्विक स्तर पर मृत्यु का दूसरा सबसे बड़ा कारण होता है ।हमें न स्वयं इसका सेवन करना चाहिए ना ही दूसरों को सेवन करने के लिए प्रेरित करना चाहिए। यदि हमें अपने परिवार समाज और राष्ट्र को खुशहाल रखना है तो हमें हर संभव इसकी लत से स्वयं सहित सब को दूर रखने का प्रयास करना होगा। तभी हम एक समृद्ध व खुशहाल राष्ट्र की कल्पना को साकार कर सकते हैं।









