Korbavani.com। ग्राम पंचायत करूमौहा में कथित वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक मनमानी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। उपसरपंच सहित पंचायत के पंचों ने सरपंच पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कोरबा को शिकायत सौंपकर पंचायत राज अधिनियम की धारा 40 के तहत पद से पृथक करने की मांग की है।शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 15वें वित्त आयोग और मूलभूत मद की राशि का आहरण बिना विधिवत पंचायत बैठक और बिना पंचों की जानकारी के किया गया। कथित तौर पर फर्जी प्रस्ताव तैयार कर राशि निकाली गई। ग्राम पंचायत विकास योजना के तहत जिन कार्यों को ग्राम सभा से अनुमोदन आवश्यक था, उन पर भी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। पूर्व सचिव के खिलाफ झूठी शिकायत कर प्रताड़ित करने और अपने अनुकूल सचिव पदस्थ कराने का प्रयास करने का आरोप भी लगाया गया है। वर्तमान सचिव को नियमित रूप से कार्य नहीं करने देने तथा पुलिस कार्रवाई की धमकी देकर दबाव बनाने की बात भी सामने आई है। मामले को और गंभीर बताते हुए पंचों ने आरोप लगाया कि आश्रित ग्राम स्थित प्राथमिक शाला भवन और आंगनबाड़ी भवन को बिना पंचायत प्रस्ताव और सक्षम अनुमति के जेसीबी मशीन से तोड़ दिया गया, जिससे शासन को आर्थिक नुकसान हुआ। भवन से निकली सामग्री के कथित विक्रय और राशि गबन का भी आरोप है।
पंचों का कहना है कि पिछले छह महीनों से पंचायत की बैठक नहीं हुई। संयुक्त हस्ताक्षर से बैंक खाता संचालन नहीं होने के कारण विकास कार्य बाधित हैं। मनरेगा सहित रोजगार योजनाएं प्रभावित हैं और ग्रामीणों को लाभ नहीं मिल पा रहा।
उपसरपंच का बयान– उपसरपंच ने कहा, “पंचायत को नियम से नहीं बल्कि दबाव और मनमानी से चलाया जा रहा है। हमें किसी भी खर्च की जानकारी नहीं दी जाती। यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो गांव के विकास का पैसा पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा।
एक पंच का बयान-: एक पंच ने आरोप लगाया, “ग्राम सभा की स्वीकृति के बिना कार्य कराए गए और राशि निकाली गई। भवन तोड़ना बेहद गंभीर मामला है। हम पारदर्शी जांच चाहते हैं और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उपसरपंच और पंचों ने स्पष्ट किया है कि यदि निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई नहीं की गई तो वे सामूहिक रूप से आंदोलन करेंगे। अब प्रशासनिक जांच और आगामी कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।




