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गेवरारोड-पेंड्रारोड रेलवे कॉरिडोर बना विकास की उम्मीद, पर राल और डोकारीखार गांवों में सड़कें बनी मुसीबत…

Korbavani.com- केन्द्र सरकार द्वारा स्वीकृत 127.7 किलोमीटर लंबा गेवरारोड-पेंड्रारोड रेलवे कॉरिडोर जहां क्षेत्रीय विकास की दिशा में एक महत्त्वाकांक्षी परियोजना मानी जा रही है, वहीं इसका निर्माण कार्य कुछ गांवों के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है। कटघोरा जनपद अंतर्गत राल और डोकारीखार गांवों के ग्रामीण इस परियोजना के चलते गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि रेलवे कार्य के चलते मुख्य सड़क मार्ग पूरी तरह कीचड़ और दलदल में तब्दील हो गया है। बारिश के मौसम में यह स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जिससे स्कूली बच्चों को समय पर स्कूल पहुंचने में दिक्कत होती है और उनकी पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। साथ ही, चिकित्सा आपातकाल की स्थिति में भी गांव से बाहर निकलना अत्यंत कठिन हो गया है। स्थानीय ग्रामीणों और कर्मचारियों को रोज इसी दलदली रास्ते से गुजरना पड़ रहा है, जिससे कई लोग फिसलकर चोटिल भी हो चुके हैं। ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व में रेलवे विभाग के अधिकारी राकेश सिंह ने समस्याओं के समाधान हेतु लिखित सहमति दी थी, जिसमें मार्ग सुधार और सुरक्षा उपायों का उल्लेख किया गया था। बावजूद इसके आज तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई है। ग्रामीणों की प्रमुख मांग है कि रेलवे कॉरिडोर के अंतर्गत बने पुलिया के किनारे मजबूत कंक्रीट वॉल का निर्माण कराया जाए, जिससे बारिश के दौरान मिट्टी का कटाव रोका जा सके और सड़क की स्थायित्व बनी रहे। उनका कहना है कि यह क्षेत्र अंदरूनी होने के कारण प्रशासन की नजरों से अक्सर ओझल रहता है, और यही कारण है कि उनकी समस्याएं लगातार उपेक्षित हो रही हैं।जहां एक ओर रेलवे कॉरिडोर क्षेत्र के समग्र विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, वहीं दूसरी ओर राल और डोकारीखार जैसे गांव इसके दुष्परिणाम भुगतने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से गुहार लगाई है कि जल्द से जल्द उनकी समस्याओं का समाधान किया जाए और विकास कार्यों के साथ सामाजिक जिम्मेदारियों का भी निर्वहन किया जाए।

Kush Sharma

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