Korbavani.com- कोरबा के ऐतिहासिक घंटाघर चौक में स्थित घड़ी पिछले दस वर्षों से बंद पड़ी थी, जिससे न केवल शहर का विकास ठप पड़ा हुआ प्रतीत हो रहा था, बल्कि यह वास्तुदोष का कारण भी बन चुका था। नगर निगम आयुक्त आशुतोष पाण्डेय ने पद संभालने के बाद इस घड़ी को फिर से चालू करने की पहल शुरू की। हमारे बुजुर्गों का मानना है कि बंद घड़ी अपशगुन मानी जाती है, और इसे हटा कर नई घड़ी लगाने से घर में समृद्धि और शांति आती है। ठीक वैसे ही, घंटाघर की बंद घड़ी को फिर से चालू करने से शहर के विकास की गति में सकारात्मक बदलाव आएगा। पहले घंटाघर की घड़ी के पुर्जे खराब हो गए थे, और बाद में इलेक्ट्रॉनिक घड़ियां भी मौसम के प्रभाव से खराब हो गईं। अब, नई घड़ी लगने से न केवल लोग समय का सही अनुमान लगा सकेंगे, बल्कि यह शहर में विकास की नई राह खोलने का प्रतीक बनेगी।
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