Korbavani.com- सड़क हादसों में पीड़ितों को तत्काल इलाज दिलाने के लिए केंद्र सरकार की “सड़क दुर्घटना नगदी रहित उपचार स्कीम 2025, 05 मई से पूरे देश में लागू हो चुकी है। और लगभग एक महीना भी हो चुके हैं इसके अंतर्गत किसी भी सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को चिन्हित अस्पतालों में डेढ़ लाख रुपए तक का मुफ्त (कैशलेस) इलाज मिल सकता है।बिलासपुर यातायात पुलिस ने इस योजना को लेकर न केवल प्रेस विज्ञप्ति जारी की है, बल्कि लगातार कार्यक्रमों और अपीलों के माध्यम से जनजागरूकता अभियान भी चला रही है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह और एएसपी ट्रैफिक रामगोपाल करियारे के निर्देशन में सड़क सुरक्षा, नियम पालन, और योजनाओं के प्रचार को लेकर मिशन मोड में काम हो रहा है।लेकिन सवाल उठता है कि कोरबा पुलिस इस मामले में अब तक क्यों है निष्क्रिय? क्या कोरबा जिले के लोगों को इस स्कीम की जानकारी नहीं होनी चाहिए? बिलासपुर पुलिस जहां स्कीम के लाभ, प्रक्रिया, और पात्रता जैसी जानकारियों को आमजन तक पहुंचा रही है, वहीं कोरबा जिले में न तो प्रेस रिलीज, न ही कोई जागरूकता कार्यक्रम सामने आया है। जब हर दिन सड़क दुर्घटनाओं में लोगों की जानें जा रही हैं, ऐसे में शासन की योजना की जानकारी न मिल पाना भी एक बड़ी लापरवाही मानी जा रही है।

योजना के प्रमुख लाभ– दुर्घटना की तारीख से 7 दिन तक कैशलेस इलाजनामित अस्पताल में 1.5 लाख तक मुफ्त इलाज। पीड़ित को तत्काल चिकित्सा सुविधा पोर्टल के माध्यम से अस्पताल को सीधा भुगतान।
योजना के क्रियान्वयन हेतु– राज्य सड़क सुरक्षा परिषद नोडल अभिकरण नियुक्त अस्पतालों का चयन, पोर्टल संचालन, व शिकायत निवारण की व्यवस्थाराष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण और आयुष्मान भारत योजना से समन्वय
इलाज की प्रक्रिया– यदि किसी पीड़ित को नामित अस्पताल में ले जाया जाता है, तो तुरंत इलाज प्रारंभ होगा। यदि आवश्यक विशेषज्ञता अस्पताल में उपलब्ध नहीं है, तो पीड़ित को अन्य चिन्हित अस्पताल में रेफर किया जाएगा और वहाँ तक पहुँचाने की व्यवस्था भी की जाएगी

कोरबा पुलिस से अपील या सवाल? कोरबा की जनता जानना चाहती है कि जब योजना पूरे प्रदेश में लागू है, तो कोरबा पुलिस ने अब तक लोगों को क्यों नहीं किया जागरूक? क्या कोरबा जिले में सड़क हादसे नहीं होते? या फिर योजनाओं की जानकारी देना यहां की प्राथमिकता में नहीं है?
यातायात पुलिस की अपील-: बिलासपुर यातायात पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे सड़क पर चलते समय हमेशा यातायात नियमों का पालन करें। नियमों की अनदेखी से होने वाली दुर्घटनाएं न केवल जान-माल की क्षति पहुंचाती हैं, बल्कि परिवारों पर भी विपरीत प्रभाव डालती हैं। “सुरक्षित चलें – सुरक्षित पहुँचें।”




