कोरबा 25जनवरी कोरबा जिले के शासकीय नवीन महाविद्यालय बाकी मोंगरा में 24जनवरी को राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई, यूथ रेड क्रॉस एवं रेड रिबन के संयुक्त तत्वाधान में महाविद्यालय में राष्ट्रीय बालिका दिवस पर आत्महत्या रोकथाम, तम्बाकू निषेध, और नशामुक्ति अभियान पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें कार्यशाला की मुख्य वक्ता डॉ. संजय कुमार तिवारी, मनोरोग चिकित्सक, जिला चिकित्सालय कोरबा ने आत्महत्या से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला. मुख्य वक्ता के अनुसार इधर कुछ वर्षों से महिला एवं पुरूषों में आत्महत्या का प्रतिशत लगभग बराबर है. आत्महत्या के कारणों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शारीरिक शोषण, नाजायज गर्भावस्था, पारिवारिक समस्या ,संपत्ति विवाद और कैरियर आत्महत्या के प्रमुख कारण है. युवाओं में अड़तालीस प्रतिशत आत्महत्या कैरियर के कारण ही होता है.
डॉ. संजय कुमार तिवारी ने कहा कि जो लोग आत्महत्या करने कि सोचते है उनमे कुछ लक्षण पहले से ही दिखाई देने लगते है जैसे-उनके बातचीत करने का तौर-तरीका, मूड और व्यवहार में नकारात्मकता झलकती है. आत्महत्या की रोकथाम पर चर्चा करते हुए वक्ता ने कहा कि इस दिशा में जागरूकता बहुत जरुर है.यदि कभी इस तरह का विचार किसी के मान में आये तो उसे कुछ पल के लिए विचारों में ठहराव देना चाहिये जैसे मानों वह रेड सिग्नल पर खड़ा हों. पल भर के ठहराव मात्र से व्यक्ति की व्याकुलता खत्म हों जाती है और वह आत्महत्या की कोशिश नहीं करता. इस दिशा में आत्म वास्तविकरण भी बहुत जरुरी है।
मुख्य वक्ता डॉ. ताराचंद चिकित्सक जिला अस्पताल कोरबा ने बताया कि नशे से विभिन्न प्रकार के दुष्परिणाम समाज पर पड़ते हैं। सबसे पहले तो व्यक्ति के स्वास्थ्य पर उसका गहरा प्रभाव पड़ता है। अल्कोहल, तंबाकू, सिगरेट आदि के सेवन से फेफड़े खराब हो जाते हैं। ड्रग्स से भी स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। शारीरिक के साथ आर्थिक रूप से भी परिवार कमजोर होता है। परिवार और समाज में प्रतिष्ठा भी धूमिल होती है। ड्रग के नशे से मानसिक रूप से भी व्यक्ति कमजोर होता है।
कार्यशाला की मुख्य वक्ता डॉ. संजय कुमार श्रीवास, कार्यक्रम समन्वयक, तम्बाकू निषेध कार्यक्रम बिलासपुर, ने बताया कि तंबाकू नियंत्रण चुनौतियों में सबसे अधिक कारण लोगों में उसके उपयोग के खतरों के संबंध में समुदाय में जागरूकता, एक साथ कई तंबाकू उत्पादों का उपलब्ध होना, कम उम्र में ही उपयोग की शुरुआत होना, तंबाकू छुड़वाने के कम केंद्र होना, इसके नियंत्रण के मार्ग में आने वाली बाधाएं है। उन्होंने बताया कि तंबाकू उत्पाद लत छोड़ने के लिए मजबूत इच्छाशक्ति एवं डॉक्टरों की परामर्श के साथ-साथ खेल व्यायाम योग का सहारा लेना चाहिए। उन्होंने बताया कि सिगरेट एवं तंबाकू उत्पाद निषेध कानून 2003 के अंतर्गत जन संस्थाओं तथा शिक्षण संस्थाओं तंबाकू धूम्रपान प्रोत्साहन पर, 18 वर्ष के कम लोगों को तंबाकू उत्पादन खरीदना व बेचने पर प्रतिबंध है। शिक्षण संस्थाओं के 100 मीटर के दायरों में किसी भी प्रकार के धूम्रपान व सिगरेट बेचने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।
नशे से कई परिवार टूटे
आज युवाओं के द्वारा किए जा रहे नशे से कई परिवार टूट चुके हैं और कई टूटने की के कगार पर हैं युवा भटक रहे हैं, इससे समाज को बहुत नुकसान हो रहा है। हम सभी को इस और ध्यान देना होगा और यदि अपने परिवार में कोई नशा कर रहा है तो उसको यह सब बातें बताकर रोकना होगा। परिवार, समाज व राष्ट्र को नशे की लत से बचाना होगा।
आत्महत्या रोकथाम, तम्बाकू निषेध, और नशामुक्ति अभियान के आयोजन का मुख्य उद्देश्य कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में आत्महत्या के कारणों व रोकथाम, बढ़ते नशे जैसी बुराई के खतरे को दूर कर स्वस्थ भारत का निर्माण करना है।
इस अवसर पर स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे
इस अवसर पर सहायक प्राध्यापकगण,भुनेश्वर सिंह कंवर, विजय कुमार लहरे, रघुराज सिंह तंवर, रविन्द्र कुमार पैकरा, अखिलेश कुमार उइके, पुरषोत्तम सिंह कंवर, गुलाब सिंह कंवर, अतिथि व्याख्याता कंचन बंजारे, लकेश्वरी केवंट, सतरूपा गोंड सहित महाविद्यालय के अन्य स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे।





