Korbavani.com । औद्योगिक नगरी कोरबा में लगातार बढ़ रहे वायु, जल और ध्वनि प्रदूषण को लेकर भारतीय मजदूर संघ एवं पर्यावरण मंच ने जिला प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। संगठन ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर जिले में पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठाने तथा प्रदूषण नियंत्रण संबंधी नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया है कि पर्यावरण प्रदूषण आज केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है। लगातार बढ़ती पेड़ों की कटाई, घटता भू-जल स्तर, जल स्रोतों का प्रदूषण और औद्योगिक गतिविधियों से बढ़ रहे प्रदूषण का असर सीधे लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर पड़ रहा है। संगठन का कहना है कि जिले में बढ़ते तापमान और जल संकट के पीछे पर्यावरणीय असंतुलन भी एक प्रमुख कारण है। भारतीय मजदूर संघ ने मांग की है कि जिले में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ठोस उपाय किए जाएं तथा प्रमुख स्थानों पर प्रदूषण स्तर दर्शाने वाले इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले बोर्ड लगाए जाएं। साथ ही नदी-नालों को प्रदूषित होने से बचाने, अनावश्यक वृक्ष कटाई पर रोक लगाने और बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान चलाने की आवश्यकता बताई गई है।ज्ञापन में सिंगल यूज प्लास्टिक की बिक्री पर प्रभावी प्रतिबंध लगाने, सभी सरकारी और निजी भवनों में रूफटॉप वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली लागू करने तथा शहर से निकलने वाले कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग भी की गई है। संगठन ने अधिक प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई तथा ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के लिए विशेष अभियान चलाने की आवश्यकता जताई है।संगठन ने यह भी मांग रखी है कि विभिन्न उद्योगों के पर्यावरणीय निरीक्षण के दौरान भारतीय मजदूर संघ के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए, ताकि निगरानी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बन सके। कोरबा में संचालित ताप विद्युत गृहों, एल्युमिनियम उद्योगों और कोयला खदानों से होने वाले प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है।ज्ञापन में विशेष रूप से कुसमुंडा, गेवरा और दीपका खदान क्षेत्रों से उड़ने वाली कोयला धूल को स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताते हुए उसके नियंत्रण के लिए विशेष व्यवस्था करने की मांग की गई है। वहीं शहर में ईंधन के रूप में कोयले के उपयोग से फैलने वाले धुएं पर भी चिंता व्यक्त की गई है।भारतीय मजदूर संघ ने बालको क्षेत्र में खाली जमीनों पर राखड़ डंपिंग और एसईसीएल मानिकपुर खदान में राखड़ प्रबंधन में कथित अनियमितताओं की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग भी उठाई है। इसके अलावा प्लास्टिक के बड़े डिब्बों में दूध वितरण पर रोक लगाने तथा पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों और सामाजिक संस्थाओं को सम्मानित कर प्रोत्साहित करने का सुझाव भी दिया गया है। संगठन का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो प्रदूषण की समस्या और गंभीर रूप ले सकती है। ज्ञापन के माध्यम से जिला प्रशासन से अपेक्षा की गई है कि कोरबा को स्वच्छ, सुरक्षित और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए आवश्यक कार्रवाई प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित की जाए।
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