Korbavani.com- पाली तानाखार विधानसभा में किस पार्टी का विधायक बनेगा, यह विधानसभा क्षेत्र कांग्रेस का, रामदयाल (बीजेपी) का या गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का …आखिर किस का गढ़ है? और प्रदेश में किसकी सरकार की ताजपोशी होगी… इसका फैसला महज एक दिन बाद हो जाएगा, लेकिन अटकलें, दावे- प्रतिदावे, कयासों का बाजार गर्म है और और राजनीति से जुड़े लोगों की धड़कनें बढ़ गई है. पाली तानाखार विधानसभा मे य़ह चुनाव विगत कई चुनाव से अलग है. कहने के लिए तो हर बार की तरह इस बार भी त्रिकोणीय संघर्ष है. कांग्रेस बीजेपी और गोंडवाना के अपने-अपने दावे हैं. लेकिन इस बार का चुनाव परिणाम तय करेगा कि पाली तानाखार विधानसभा क्षेत्र वाकई में किसका गढ है. यह क्षेत्र आदिवासी के लिए सुरक्षित सीट है. जहां आदिवासी बाहुल्य मतदाताओं की संख्या तीन चौथाई से भी अधिक है. जो क्षेत्र का विधायक चुनने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इस विधानसभा क्षेत्र में राज्य निर्माण के बाद चार चुनाव हो चुके हैं. जिसमें चारों बार कांग्रेस ने विपरीत परिस्थितियों में भी जीत दर्ज किया है. इस कारण स्वाभाविक तौर पर इसे कांग्रेस का गढ़ माना जाता है , विशेष कर पिछले चुनाव में जब रामदयाल कांग्रेस छोड़कर चुनाव के ठीक पहले भाजपा में शामिल हुए तो कांग्रेस को प्रत्याशी मिलना मुश्किल हो गया था, ऐसे में मोहित राम केरकेट्टा को टिकट मिला और वह ऐतिहासिक जीत दर्ज करने में सफल रहे, इस बार उनके स्थान पर कांग्रेस ने जनपद पंचायत पाली की अध्यक्ष दुलेश्वरी सिदार को टिकट दिया है जो क्षेत्र में गुरु अम्मा के नाम से जानी जाती हैं. और कांग्रेस अपने परंपरागत वोटों व भूपेश का भरोसा जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं.लेकिन इसके दिगर गत चुनाव में मतदान के महज 3 सप्ताह पूर्व भाजपा मे शामिल हुए तीन बार के तत्कालीन कांग्रेस विधायक रामदयाल उइके ,कांग्रेस को मिले वोटों को अपना वोट बताते हुए एक बार फिर इस चुनाव में भाजपा की टिकट पर लड़े हैं और जीत को लेकर आश्वस्त होते हुए दावा करते हैं कि गत चुनाव में उन्होंने चुनाव चिन्ह को लेकर जनता के बीच अपनी पहचान नहीं बनाई थी लेकिन अब पूरी बाजी पलट गई है और अब इस क्षेत्र रामदयाल उइके ने भाजपा का गढ़ बना दिया. यह दावा ऐसे समय में है जबकि पिछले दो दशक में हुए चुनाव में भाजपा को यहां से 30 से 35 हजार वोट ही मिलते रहे हैं, वहीं गोगपा के सुप्रीमो दादा हीरा सिंह मरकाम की विरासत,उनके जनाधार को भी य़ह चुनाव तय करेगा. स्व श्री मरकाम के पुत्र तुलेश्वर मरकाम इस बार चुनाव मैदान में रहे जो परंपरागत तरीके से पूरी शिद्दत के साथ चुनाव लड़ते हुए जीत के दावे को लेकर अटल है. गोंडवाना के वोट पिछले हर चुनाव में लगातार बढ़े हैं और विशेष कर गोंड आदिवासी समुदाय के वोट एक तरफा उनको मिले हैं. यह तो पार्टियों के अपने-अपने दावे हुए. इस चुनाव में तीनों ही पार्टियों ने भीतरघात झेला है. कोई कम तो कोई ज्यादा! जो किसी भी पार्टी के समीकरण को गड़बड़ा सकता है। बहरहाल 3 दिसंबर को मतगणना के नतीजे इनकी किस्मत का फैसला करेंगे. तब यह भी निर्णय हो जाएगा कि वाकई में पाली तानाखार विधानसभा किस पार्टी का गढ़ है!
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