Korbavani.com- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन के तहत कोरबा जिले के ग्रामीण अंचलों में प्रत्येक घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। कोरबा जनपद की ग्राम पंचायत बेला के पांडवपारा बस्ती में इस योजना की पोल खुलती नजर आ रही है।स्थानीय पांडव जनजाति के परिवारों को जल जीवन मिशन के तहत नल कनेक्शन तो दे दिए गए, लेकिन निर्माण में न मानक का ध्यान रखा गया, न गुणवत्ता का। कई स्थानों पर नल को बिना चबूतरे के सीधे जमीन में गाड़ दिया गया, जिससे अब अधिकांश नल या तो झुक गए हैं या गिर चुके हैं।ग्रामीणों का कहना है कि छह महीने पहले नल लगाए गए थे, लेकिन आज तक उनमें पानी नहीं आया। स्थिति यह है कि उन्हें अब भी पुराने संसाधनों से पानी लाना पड़ रहा है। इससे योजना की गंभीरता और उसके उद्देश्यों पर सवाल उठ रहे हैं।सबसे चिंताजनक बात यह है कि अभी तक कोई भी अधिकारी निरीक्षण के लिए मौके पर नहीं पहुंचा है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी ठेकेदारों तथा लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि योजनाओं का लाभ वास्तव में आम जनता तक पहुंच सके।
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