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एक साल बाद भी अधूरे पीएम जनमन योजना आवास- किश्त मिली, फिर भी नहीं बना कोरवा परिवारों का आशियाना…

Korbavani.com। जनपद पंचायत कोरबा अंतर्गत ग्राम पंचायत नकिया में पीएम जनमन योजना के तहत पहाड़ी कोरवा परिवारों के लिए स्वीकृत आवासों के निर्माण में लापरवाही का मामला सामने आया है। योजना के तहत हितग्राहियों को आवास निर्माण के लिए किश्तों में राशि जारी की गई, लेकिन निर्धारित अवधि बीतने के बाद भी चार आवास अधूरे पड़े हैं। मामले में जनपद पंचायत ने रामप्रसाद व्यक्ति को अंतिम चेतावनी देते हुए तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। विभागीय दस्तावेजों के अनुसार नकिया पंचायत में चार से अधिक हितग्राहियों के आवास निर्माण कार्य लंबित हैं। इनमें तीन हितग्राहियों को तीसरी किश्त और एक हितग्राही को दूसरी किश्त की राशि जारी की जा चुकी है। इसके बावजूद निर्माण कार्य अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पाया। बंधुराम, मनियारी और जगतराम पहाड़ी कोरवा के आवासों के लिए 1 लाख 80 हजार ,1 लाख 80 हजार रुपये की राशि जारी होने की जानकारी दर्ज है। इन आवासों का निर्माण रूफ कास्ट स्तर तक पहुंचा है, लेकिन आगे का कार्य लंबित है। वहीं सिंधु राम के आवास के लिए एक लाख रुपये की दूसरी किश्त जारी होने के बावजूद मकान अभी प्लिंथ स्तर से आगे नहीं बढ़ सका है। हितग्राहियों का कहना है कि आवास निर्माण का काम गांव के ही रामप्रसाद एक ठेकेदार के माध्यम से कराया जा रहा था। उनका आरोप है कि किश्त की राशि लेने के बाद भी आवासों का निर्माण पूरा नहीं कराया गया। इससे संबंधित परिवारों को योजना का पूरा लाभ नहीं मिल पाया है। विभाग के अनुसार इन लंबित आवासों को अगस्त 2026 तक पूरा करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन मौके पर अपेक्षित प्रगति नहीं मिली। इसके बाद जनपद पंचायत ने संबंधित व्यक्ति को अंतिम चेतावनी जारी की है।

तीन दिन में जवाब नहीं तो एफआईआर का नोटिस जारी- अंतिम चेतावनी पत्र में कहा गया है कि तीन दिवस के भीतर संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं किया गया तो थाना लेमरू में एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद अब यह देखना होगा कि लंबित आवासों का निर्माण कब तक पूरा होता है और हितग्राहियों को उनका सुरक्षित आशियाना कब मिल पाता है। पीएम जनमन योजना का उद्देश्य विशेष रूप से कमजोर जनजातीय परिवारों को पक्का और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है। ऐसे में राशि जारी होने के बाद भी मकानों का अधूरा रहना योजना के जमीनी क्रियान्वयन और संबंधित जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।

Kush Sharma

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