इंडस पब्लिक स्कूल दीपका’ के होनहार विद्यार्थियों ने अपने चित्र एवं स्लोगन के माध्यम से व्यक्त की पर्यावरण प्रदूषण के प्रति चिंता एवं दिया प्रकृति को संवारने का संदेश।
Korbavani.com- विश्व पर्यावरण दिवस वर्ष 1972 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा स्थापित किया गया था। यह पहली बार वर्ष 1973 में पृथ्वी पर वातावरण को प्रदूषित होने से बचाने के लिए सकारात्मक कदम उठाने और इस दिशा में दुनिया भर के लोगों को प्रेरित करने के उद्देश्य से विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया था।हमारी पृथ्वी जो हमारा घर है, जहां हम मनुष्य, पशु-पक्षी, पौधे निवास करते हैं, इसके ही पर्यावरण के संरक्षण के लिए विश्व पर्यावरण दिवस हर साल 5 जून को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत साल 1972 में मानव पर्यावरण पर आयोजित संयुक्त राष्ट्र सम्मलेन के दौरान हुई थी। पहला विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून, 1974 को “केवल एक पृथ्वी” स्लोगन/थीम के साथ मनाया गया था।इस बार ‘विश्व पर्यावरण दिवस 2023’ की थीम ‘Solutions to Plastic Pollution’ है।यह थीम प्लास्टिक प्रदूषण के समाधान पर आधारित है।मानव द्वारा अपने हित के लिए लगातार पृथ्वी के संसाधनों का दोहन करने के कारण होने वाली क्षति को रोकने और पृथ्वी को बचाने के लिए पर्यावरण दिवस की शुरुआत की गई। मानव ने पिछले 200 वर्षो में अपनी उन्नति और प्रगति के नाम पर प्रकृति का जो शोषण किया है, उसी का परिणाम है जो आज हम अपने पर्यावरण में परिवर्तन देख रहें है। यदि इस पर अब भी दृढ़ता के साथ विचार नहीं किया गया, तो आने वाले समय में हमें इसके भयंकर परिणाम भुगतने होंगे। इस विषय को लेकर विश्व में जागरूकता और पर्यावरण संरक्षण करने के लिए हर वर्ष 5 जून को वर्ल्ड एनवायरनमेंट डे यानी अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। दीपका स्थित इंडस पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों ने भी इस महोत्सव को जोर-शोर से मनाया और लोगों को पर्यावरण सुरक्षा एवं संरक्षण का संदेश दिया ।विद्यालय में अध्ययनरत विभिन्न कक्षा स्तर के विद्यार्थियों ने एसईसीएल गेवरा क्षेत्र द्वारा आयोजित पर्यावरण सुरक्षा एवं संरक्षण प्रतियोगिता में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया इस प्रतियोगिता के अंतर्गत चित्रकला एवं स्लोगन राइटिंग कंपटीशन के अंतर्गत अपनी चित्र कला एवं स्लोगन राइटिंग कला का प्रदर्शन किया । इन प्रतियोगिताओं में बच्चों ने अपनी उत्कृष्ट प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए प्रथम ,द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार प्राप्त किया ।विद्यार्थियों को एसईसीएल गेवरा महाप्रबंधक के कार्यालय में एक भव्य समारोह में एसईसीएल के उच्च अधिकारियों के द्वारा पुरस्कृत किया गया ।विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र के साथ आकर्षक उपहार भी प्रदान किया गया। इन विजित विद्यार्थियों में क्रमशः चित्र कला प्रतियोगिता में प्राथमिक स्तर से प्रथम निधि वर्मा ,द्वितीय वरुण सहारन एवं तृतीय स्थान कविश सिदार ने प्राप्त किया। इसी प्रकार माध्यमिक स्तर में प्रथम पुरस्कार अन्वी सिंह, द्वितीय पुरस्कार पायल सहारण एवं तृतीय पुरस्कार निधि वर्मा को प्रदान किया गया। उच्चतर माध्यमिक स्तर में स्लोगन राइटिंग कंपटीशन में प्रथम स्थान निकिता कंवर ,द्वितीय स्थान कृष सिंधु एवं तृतीय स्थान मितुल गौतम ने प्राप्त किया ।सभी विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र एवं पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। विद्यार्थियों ने अपने चित्र एवं स्लोगन में पर्यावरण के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए लोगों को एक संदेश देने का प्रयास किया। विद्यार्थियों के चित्र एवं स्लोगन से स्पष्ट झलकता था कि विद्यार्थियों को पर्यावरण की कितनी चिंता है ।उन्होंने अपने कला के माध्यम से लोगों को बताने का प्रयास किया कि धरती हमारी माता है और धरती में उत्पन्न जितने भी पशु पक्षी और वनस्पतियां हैं वह हमारे जीवन के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं। हमें इन्हें किसी भी स्तर पर नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए।विद्यालय के प्राचार्य डॉ संजय गुप्ता ने कहा कि मानव ने हमेशा अपने विकास के लिए प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करने का प्रयास किया है, इसके लिए विश्व के सभी देश अपनी प्रगति के लिए प्रकृति के संसाधनों का वहन कर रहें है, जिसका परिणाम है कि प्रदूषण का स्तर काफी तेज़ी से बढ़ता जा रहा है। हम अपनी सुख-सुविधा के लिए अधिकाधिक पेट्रोलियम जैसे पदार्थो का उपयोग करते हैं, घर को वातानुकूलित रखने के लिए ए.सी का उपयोग करते हैं तथा साथ ही कारखानों से निकलने वाले जैविक पदार्थ जो सुविधा के अनुसार कहीं भी छोड़ दिए जाते हैं, प्रदूषण को बढ़ावा देने में अपना योगदान दे रहें हैं, जिससे पृथ्वी का बुखार (तापमान) लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में यदि इसे अभी भी कम न किया गया, तो मानव सभ्यता को नष्ट होने में अधिक समय नहीं लगेगा। इस प्रदूषण का भयानक परिणाम यह हो सकता है कि इस पृथ्वी पर जीवन की परिकल्पना करना भी असंभव हो जाएगा। हमें हर हाल में कृत संकल्प होकर पर्यावरण के संरक्षण और सुरक्षा हेतु गंभीर प्रयास करने ही होंगे ताकि आने वाली पीढ़ी सुख में जीवन व्यतीत कर सकें हमें या कभी नहीं बोलना चाहिए कि प्रकृति नहीं तो हम नहीं।









