कोरबा

आईपीएस दीपिका के समर कैंप में विद्यार्थी सीख रहे नृत्य की विभिन्न विधाएं।

कथक भरतनाट्यम ,ब्रेक डांस, बिहू ,पंजाबी, ओडीसी ,ही हॉप इत्यादि डांस विधान से अवगत हो रहे समर कैंप के विद्यार्थी।

Korbavani.com- नृत्य भी मानवीय अभिव्यक्तियों का एक रसमय प्रदर्शन है। यह एक सार्वभौम कला है, जिसका जन्म मानव जीवन के साथ हुआ है। बालक जन्म लेते ही रोकर अपने हाथ पैर मार कर अपनी भावाभिव्यक्ति करता है कि वह भूखा है- इन्हीं आंगिक -क्रियाओं से नृत्य की उत्पत्ति हुई है। लोक नृत्य पारंपरिक रूप से भारत में धर्म और संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। भारतीय पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवताओं ने नृत्य का आविष्कार किया था। जिसके बाद से हिंदू कलाओं में नृत्य सबसे प्रतिष्ठित माना जाने लगा। भारतीय नृत्य में इशारों, शरीर की स्थिति और सिर की गति पर जोर दिया जाता है।जिसमें की प्राथमिक महत्व हाथों, उंगलियों और आंखों के उपयोग पर दिया जाता है। भारतीय नृत्य में इशारों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कुछ नृत्यों में 600 से अधिक हावभाव होते हैं, जिनमें से प्रत्येक का एक विशिष्ट अर्थ होता है। इशारों का अक्सर एक संहिताबद्ध अर्थ होता है जो नृत्य देखते वाले दर्शकों के लिए पहचाना जाता है।इंडस पब्लिक स्कूल दीपका में संचालित समर कैंप में विद्यार्थी नित्य की विभिन्न विधाओं से पारंगत हो रहे हैं जैसे ही विद्यार्थी प्रातः विद्यालय पहुंचते हैं उन्हें म्यूजिकल एरोबिक्स एक्सरसाइज कराकर उनकी शरीर को फिट रखा जाता है। इसके पश्चात उन्हें नृत्य की विभिन्न विधाओं के बारे में बता कर अभ्यास कराया जाता है ।प्रतिदिन विद्यार्थियों को कत्थक ,ऑडिसी, बिहू ,ब्रेक डांस, भरतनाट्यम इत्यादि नृत्य कलाओं का प्रशिक्षण दिया जाता है ।विद्यार्थियों को नृत्य सिखाने हेतु विद्यालय के नृत्य प्रशिक्षक हरिशंकर सारथी एवं राम यादव का भरपूर योगदान है। वे प्रतिदिन बच्चों को अलग-अलग नृत्य विधाओं से रूबरू कराते हैं ।विद्यार्थी नृत्य प्रशिक्षकों के साथ लय और ताल में ताल मिलाने का प्रयास करते हैं। प्रत्येक विधाओं से विद्यार्थियों को पारंगत करने का प्रयास समर कैंप में किया जा रहा है। विद्यार्थि समर कैंप में भांगड़ा डांस का भी लुफ्त उठा रहे हैं ,साथ ही वे ओडीसी ,भरतनाट्यम और कत्थक जैसी बारीक नृत्य शैली का भी रोजाना अभ्यास कर लाभान्वित हो रहे हैं। बिहू नृत्य जैसे एनर्जेटिक डांस का भी विद्यार्थी आनंद उठाते हैं, साथ ही छत्तीसगढ़ी लोक नृत्य सुआ ,करमा, ददरिया और राउत नाचा का भी रोजाना अभ्यास कर अपनी कलाओं को निखारने का प्रयास कर रहे हैं। विद्यार्थी विभिन्न बॉलीवुड टॉलीवुड एवं हॉलीवुड सॉन्ग पर डांस का प्रैक्टिस करते हैं ।ज्यादा से ज्यादा जोर विद्यार्थियों को लोकनृत्यों की जानकारी देकर उसकी नृत्य शैली का अभ्यास कराने पर दिया जा रहा है।नृत्य प्रशिक्षक राम यादव एवं हरिशंकर सारथी सर ने बताया कि नृत्य करने से हम तन व मन से तंदुरुस्त रहते हैं। हमारे शरीर में लचक होती है ।हमें स्फूर्ति रहती है। नृत्य करना हमारे आंतरिक रुप से प्रसन्न रहने का परिचायक है ।हमारी कोशिश है कि समर कैंप में आने वाले प्रतिभागियों को लोकनृत्य की विभिन्न कलाओ में हम पारंगत करें ।उन्हें नृत्य की हर बारीकी को सिखाने का प्रयास करें ।नृत्य हममें आत्मविश्वास का भी संचार करता है। विद्यालय के यशस्वी परिचार्य डॉ संजय गुप्ता ने कहा कि समर कैंप में वैसे तो विभिन्न एक्टिविटीज के माध्यम से बच्चों की प्रतिभाओं को निखारने का प्रयास किया जा रहा है ,जिसमें से एक एक्टिविटी डांस का भी है ।हमारे विद्यालय में संचालित समर कैंप में डांस एक्टिविटीज के तहत विभिन्न प्रकार के डांस फॉर्म से बच्चे रूबरू हो रहे हैं। ज्यादा जोर लोकनृत्यों पर दिया जा रहा है ।ताकि प्रतिभागी हमारे भारत देश के विभिन्न राज्यों के लोकप्रिय लोकनृत्यों के बारे में जान सकें और उनकी नृत्य शैली को सीख सकें। बेशक समापन समारोह में नृत्य शैलियों की झलकियां हमें देखने को मिलेगी ।बच्चे भी सतत रूप से नृत्य प्रशिक्षकों के साथ अभ्यास कर रहे हैं ।उनके चेहरे की प्रसन्नता देखते ही बनती है जो इस बात का प्रमाण है कि वह समर कैंप में कितना आनंदित महसूस कर रहे हैं। हमारी आगे भी यही कोशिश रहेगी कि हम बच्चों के अंदर छिपी हुई प्रतिभाओं को निखारने का सतत प्रयास करते रहें ।हम उन्हें हर वह प्लेटफार्म देना चाहते हैं, जिससे कि वह अपने आपको एक्सप्रेस कर सकें ।अपनी प्रतिभाओं को एक नया परवाज दे सकें।समर कैंप में हमारी लगातार यही कोशिश है। इसके अलावा हम विद्यालय में भी अन्य दिनों में बच्चों को ऐसे भरपूर मौके देते हैं ,जिससे उनकी प्रतिभा से हम रूबरू हो सकें ,अवगत हो सकें इसके लिए हम हमेशा से प्रयासरत एवं कटिबद्ध हैं।

Kush Sharma

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