देवपहरी 26अप्रैल,कोरबा जिले के सुदूर वनांचल दूरस्थ आदिवासी बहुल छत्तीसगढ़ राज्य में बड़े हर्षोल्लास उमंग पूर्वक कृषि संबंधित प्रसिद्ध कठोरी तिहार पिछले 22 अप्रैल को मनाया गया जिसमे अपने राज्य के मुख्य ने भी प्रदेश वासियों को बधाई शुभकामनाएं दी।अपने छत्तीसगढ़ राज्य में इस त्यौहार का बहुत बड़ा महत्व है पूरे ग्राम वासियों द्वारा एक जगह जहा पर देवरास गुड़ी स्थल होता है वही पूरे गांव के पुरुष लोगो के द्वारा एवम ग्राम बैगा द्वारा सामूहिक पूजा पाठ एवम कृषि संबंधित नियम विधि किया जाता है आदिवासियों का मानना है कि इस दिन जैसा क्रिया किया जाता है खेती पानी करते ठीक आगे जाकर सच होता है। इसलिए यह त्यौहार अपने आप में बड़े मायने रखता है।
ग्राम पंचायत देवपहरी के अंतर्गत ग्राम डीडासराई में आज 26 अप्रैल को ग्राम बैगा द्वारा सामूहिक बैठक बुलाकर दिन तय किया गया था इस दिन का विशेष कड़ाई नियम लागू है पुरखे द्वारा कि सुबह से कोई भी पानी नहीं लाता है अगर कोई लाता भी तो जुर्माना लगाया जाता है,बैगा द्वारा पूजा आरती के बाद ही पानी लाते हैं।इस कार्यक्रम में सभी परिवारो से एक नारियल साल के पत्ते का दोना में चावल दाल अगरबत्ती लाने का विशेष नियम होता है उसके बाद ग्राम बैगा रामप्रसाद राठिया द्वारा देवरास गुड़ी स्थल पर जगदेव सिंह,गुरबार सिंह,रामायण सिंह,राजेश्वर सिंह द्वारा पूजा पाठ एवम खेती किसानी यानी हल चलाकर धान बोकर पानी बरसाकर एवम बच्चो द्वारा फसल को जानवरो को मार भगाकर रक्षा करने का नियम किया जाता है,उसके ग्राम बैगा द्वारा सभी ग्राम वासियों को धन रास वितरण किया जाता है जिसका बहुत बड़ा महत्व होता है,ठाकुर देव डिहारिन ढोढी गोसाइन को पूजा आँचा दिया जाता है इस त्यौहार के एक दिन पूर्व सभी परिवारों से चावल एवम महुआ चंदा लिया जाता है चावल को रोटी एवम महुआ लाटा का प्रसाद का आनंद लिया जाता है,अपने पुरखे समेसिंह देवसिंह राठिया से जानकारी मिला कि जब पहले अकाल पड़ा था तो महुआ लाटा से ही भूख मिटाया जाता था,अब समय बदलने पर इसकी महत्व कम हो चुकी है।कार्यक्रम के अंतिम में सभी परिवारों को प्रसाद वितरण किया जाता है।





