Korbavani.com। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर ग्राम पंचायत मानिकपुर के पंडो पारा में पंडो समाज ने अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और सामाजिक एकजुटता का जीवंत प्रदर्शन किया। जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से बड़ी संख्या में पंडो समाज के लोग कार्यक्रम में शामिल हुए। पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हुए आयोजन में धार्मिक आस्था और लोक संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला।कार्यक्रम की शुरुआत पंडो समाज द्वारा अपने इष्ट देव की पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना के साथ की गई। समाज के लोगों ने सामूहिक रूप से अपने देवी-देवताओं का स्मरण कर परिवार और समाज की सुख-समृद्धि, खुशहाली एवं शांति की कामना की। पूजा-अर्चना के बाद पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।इस दौरान सुवा और कर्मा नृत्य ने आयोजन में विशेष रंग भर दिया। पारंपरिक वेशभूषा में महिला-पुरुषों ने सामूहिक रूप से नृत्य प्रस्तुत किया। ढोल-मांदर और लोकधुनों की थाप के बीच समाज के लोगों ने अपनी सदियों पुरानी सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत किया। आयोजन स्थल पर मौजूद लोगों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का उत्साहपूर्वक आनंद लिया।विश्व आदिवासी दिवस के इस आयोजन का उद्देश्य केवल उत्सव मनाना ही नहीं, बल्कि पंडो समाज की पारंपरिक संस्कृति, लोककला और सामाजिक मूल्यों को संरक्षित करने का संदेश देना भी रहा। समाज के लोगों ने कहा कि आधुनिक दौर में अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखना और नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ना बेहद जरूरी है।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व जनपद सदस्य शिव भरोस लकड़ा उपस्थित रहे। उन्होंने समाज के लोगों को विश्व आदिवासी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आदिवासी समाज की संस्कृति और परंपराएं देश की विविधता और गौरव का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन्हें संरक्षित करने के लिए समाज की एकजुटता जरूरी है।कार्यक्रम में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे पंडो समाज के लोगों की मौजूदगी ने आयोजन को भव्य रूप दिया। पूरे कार्यक्रम के दौरान सामाजिक एकता, सांस्कृतिक गौरव और परंपराओं के संरक्षण का संदेश प्रमुखता से उभरकर सामने आया।
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