Korbavani.com। जिले में लगातार हो रही बारिश के बीच मिनीमाता बांगो जलाशय में जलभराव तेजी से बढ़ रहा है। बांध में पानी का स्तर 89.55 प्रतिशत तक पहुंच गया है। जलाशय में पानी की आवक बढ़ने पर किसी भी समय गेट खोलकर हसदेव नदी में पानी छोड़ा जा सकता है। संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने नदी किनारे और बाढ़ क्षेत्र में आने वाले गांवों को अलर्ट किया है।मिनीमाता हसदेव बांगो बांध संभाग क्रमांक-3 माचाडोली के कार्यपालन अभियंता एस.के. भारती ने बताया कि वर्षाकाल के दौरान आवश्यकता पड़ने पर माचाडोली स्थित मिनीमाता बांगो बांध से हसदेव नदी में पानी प्रवाहित किया जाएगा। जलाशय में बारिश के कारण लगातार पानी की आवक बनी हुई है, जिसके चलते निचले इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई है।
बाढ़ क्षेत्र से संपत्ति हटाने की चेतावनी- जल संसाधन विभाग ने बांध के नीचे हसदेव नदी के किनारे बाढ़ क्षेत्र में स्थापित चल-अचल संपत्तियों को सुरक्षित स्थान पर हटाने की सूचना जारी की है। बाढ़ क्षेत्र में आने वाली खनिज खदानों, ठेकेदारों, औद्योगिक इकाइयों और अन्य संस्थानों को भी अपनी मशीनरी, उपकरण एवं अन्य परिसंपत्तियां सुरक्षित स्थान पर ले जाने के निर्देश दिए गए हैं।विभाग ने स्पष्ट किया है कि अचानक बाढ़ आने से होने वाली किसी भी प्रकार की क्षति के लिए जल संसाधन विभाग जिम्मेदार नहीं होगा। इसके साथ ही संभावित बाढ़ प्रभावित गांवों में मुनादी कराकर ग्रामीणों को समय रहते सतर्क करने के निर्देश दिए गए हैं।
इन गांवों पर विशेष नजर- संभावित बाढ़ क्षेत्र में बांगो, चर्रा, पोड़ी उपरोड़ा, कोनकोना, लेपरा, टुनियाकछार, पाथा, गाड़ाघाट, छिनमेर, कछार, कलमीपारा, सिलीयारीपारा, जूनापारा, तिलाईडाड, डुगुपारा, टुंगुमांड़ा, छिर्रापारा, मछलीबाटा, कोरियाघाट, धनगांव, डोंगाघाट, नरमदा, औराकछार, सोनगुड़ा, जेलगांव, झाबू, नवागांव, तिलसाभाटा, लोतलोता, स्याहीमुड़ी, कोडा, हथमार, झोरा और सिरकीकला सहित कई गांव शामिल हैं।
नदी किनारे जाने से बचने की अपील– जलाशय में बढ़ते जलभराव को देखते हुए नदी किनारे रहने वाले ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील की गई है। लोगों को हसदेव नदी के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी की संभावना को देखते हुए नदी एवं निचले इलाकों में जाने से बचने और प्रशासन की चेतावनी का पालन करने कहा गया है।बारिश और जलाशय में पानी की आवक को देखते हुए आने वाले समय में बांध के गेट खोलने की स्थिति बन सकती है। ऐसे में निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।




