Korbavani.com। छत्तीसगढ़ के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट की इकाई-1 में हुए हादसे के बाद कंपनी ने मृतकों और घायलों के परिजनों को पूर्ण मुआवजा प्रदान कर दिया है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि प्रभावित कर्मचारियों और उनके परिवारों के साथ हर स्तर पर सहयोग जारी रहेगा। बीते सप्ताह बॉयलर से जुड़ी तकनीकी समस्या के कारण उच्च दबाव वाले गर्म पानी और भाप का रिसाव हुआ था। उस समय मौके पर ठेका कंपनी एनजीएसएल (एनटीपीसी जीई पावर सर्विसेस लिमिटेड) और उप-ठेका कंपनी के कुल 35 कर्मचारी मौजूद थे। यह इकाई एनजीएसएल द्वारा संचालित की जा रही थी। कंपनी के अनुसार, मृतकों के परिजनों को 35 लाख रुपये और घायलों को 15 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है। सभी 35 प्रभावित व्यक्तियों के परिवारों को मुआवजे का भुगतान पूरा कर लिया गया है। साथ ही, मृतकों के आश्रितों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और बच्चों की 12वीं तक शिक्षा में सहयोग देने का आश्वासन भी दिया गया है। घायलों के उपचार का पूरा खर्च कंपनी वहन कर रही है। अस्पतालों में भर्ती कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए रहने, भोजन और काउंसिलिंग की समुचित व्यवस्था की गई है। प्रभावित परिवारों के अनुसार कंपनी की ओर से लगातार सहयोग मिल रहा है और इलाज की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। वेदांता पावर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजिंदर सिंह आहूजा ने हादसे पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि कंपनी इस कठिन समय में प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है। उन्होंने बताया कि घायलों के बेहतर इलाज और उनके शीघ्र स्वस्थ होने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही, घटना के कारणों की जांच के लिए संबंधित एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग किया जा रहा है। हादसे के बाद तत्काल इमरजेंसी प्रोटोकॉल लागू कर राहत एवं बचाव कार्य तेज़ी से संचालित किए गए। घायलों को रायगढ़, खरसिया और रायपुर के अस्पतालों में भर्ती कराया गया। संयंत्र स्तर पर केंद्रीय आपदा प्रबंधन टीम गठित कर समन्वय स्थापित किया गया।प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए ‘वेदांता संवेदना केंद्र’ भी स्थापित किया गया है, जहां से उन्हें आवश्यक जानकारी और सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए भी विशेष परामर्श की व्यवस्था की गई है।कंपनी ने कहा है कि वह पूरी पारदर्शिता के साथ घटना की समीक्षा कर रही है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।





