Korbavani.com- कुछ ही दिनों बाद परीक्षाओं का दौर शुरू होने वाला है। कई विद्यार्थी एक अच्छी प्लानिंग के साथ रिवीजन पर आ गए और कुछ विद्यार्थी साल भर ध्यान न दे पाने के कारण संशय में हैं। विद्यार्थियों के ग्रुप में भी चर्चा का विषय फिलहाल अभी यही रहता है । खासकर तब जब दसवीं व बारहवीं में हों क्योंकि ये सभी बोर्ड में शामिल होने वाली कक्षाएं हैं।जहाँ विद्यार्थी परीक्षा तैयारी में है। उतना ही दबाव माता-पिता पर भी आता ही है क्योंकि अपने बच्चों की साल भर की तैयारी को फलीभूत जो करना है। इस समय कई विद्यार्थियों के मनोभावों में क्रांतिकारी परिवर्तन होते हैं ,जैसे घबराहट के कारण खाना न खाना, नींद पूरी न होना, रिवीजन की प्लानिंग न कर पाना, पढ़ते ही कइयों को नींद आने लगती हैं। उन्हें महसूस होता है कि देर से पढ़ लेंगे, कल करेंगे क्योंकि साल भर अध्ययन टलता रहा । जो मोबाइल उपयोग करने की में लत हैं , वो मोबाइल को छोड़ने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं या फिर एक साथ पूरा कोर्स करने की कोशिश और महत्वपूर्ण प्रश्नों की खोज । कुछ विद्यार्थी व्यक्तिगत समस्याओं व कठिन स्थितियों का सामना करते हुए भी एक प्लानिंग के साथ रिवीजन तो कर रहे लेकिन डर भी रहें हैं । कुछ टॉप आने की तैयारी में लगे हैं, कुछ पास हो जाये, उसी में संतुष्ट हो जाएंगे । कुल मिलाकर विविधता में भी सिर्फ एकता की तरह सभी के पास विषयों की रणनीति की तैयारी चल रही।फिलहाल ये परीक्षा का समय और मौसम के परिवर्तन का दौर भी रहता है- फरवरी-मार्च। एक तरह से मौसम का संक्रमण काल जिसमें कई रोगकारक सूक्ष्मजीव उत्पन्न होते हैं । यही वह समय होता है , जब एलर्जी, वायरल फीवर, स्माल पॉक्स, चिकन पॉक्स की बीमारियां फैलती रहती हैं। परीक्षा का समय है, ऐसे में खान-पान व सूक्ष्मजीवों से बचने की जानकारियां होना आवश्यक है।परीक्षा के समय या शुरू होने के पहले खानपान का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। कुछ चीज़ों में परहेज रखे – जैसे बाहर का खाना या स्ट्रीट फूड, ज्यादा तली चीज़ें या खट्टे पदार्थ । विद्यार्थी ज्यादातर बैठ-बैठे ही अध्ययन करेंगे, इसीलिए ज्यादा चाय व कॉफ़ी का उपयोग करते हैं । ज्यादा चाय-कॉफ़ी अमाशय में अम्लता की अतिवृद्धि करता है। इस कारण पेट में मरोड़ या कब्ज विकसित होती हैं। अधिकतर बच्चे परीक्षा के तनाव के समय भूखे रहते हैं। ये भी अतिअम्लता व कमजोरी को बढ़ाती है। अतः शरीर को संतुलित आहार मिलना जरूरी है- जैसे सुबह फल, मिश्रित हल्का नाश्ता, दाल चावल, रोटी, सब्जी, छाँछ, सलाद , रात को हल्का खाना , खिचड़ी या दलिया, बेसन चिला क्योंकि इससे आयरन मिलता है व रात को दूध लेना उचित होगा। बोर्ड एग्जाम के समय विषयानुसार ब्लू प्रिंट की सहायता अवश्य लेनी चाहिए। रात को सोने के पहले आसान पाठों का रिवीजन कर सोना चाहिए, जिससे एक साथ कई पाठों का रिवीजन या याद न करना पड़े । याद कर लेने के बाद ‘बिना देखे लिखने का अभ्यास अवश्य करें’। जितना हम लिखेंगे उतनी ज्यादा स्मरण क्षमता बढ़ेगी । ये हमने सुना ही होगा *’करत करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान’*। वर्षपर्यन्त विद्यालय में शिक्षकों द्वारा कराए गए टेस्ट , परीक्षाओं के पेपर का रिवीजन भी करें। सुबह जल्दी उठकर इष्टदेव व माता पिता का ध्यान करें, अच्छे दिन व अध्ययन के लिए प्रार्थना अवश्य करें। पूर्व में रिजल्ट जो भी रहा हो , आज की तैयारी को ही ध्यान दें , उस पर सकारात्मक सोच रखना उपर्युक्त होगा। अच्छी नींद ले, आलस को हावी न होने दें । आवश्यकता अनुरूप व्यायाम, योग करें , यह स्मरण शक्ति को बढ़ाएगा।
जिम्मेदारी हमारी– ये समय कड़ी मेहनत का समय हैं। प्रयास से ही सफलता मिलेगी। पुराने 5 वर्षों के पेपर्स का रिवीजन करें।माता पिता घर में परीक्षा के अनुकूल परिस्थिति बनाये रखें।बच्चों को बार बार अधिक नम्बर लाने या भविष्य की चिंता ना जताएं। बच्चे को उसकी क्षमता अनुरूप सहयोग करें, दबाव न बनाये।” उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथै न ही सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः”llकार्य की सफलता के लिए मेहनत करनी पड़ती है, ऐसे ही सिंह के मुख में मृग स्वयं प्रवेश नहीं करता है।




