निर्माण शुरू, दीवार ध्वस्त: कोरवापारा आंगनबाड़ी भवन में गुणवत्ता पर बड़ा सवाल..
Korbavani.com । जनपद पंचायत पोड़ी उपरोड़ा अंतर्गत ग्राम पंचायत गुरसिया इन दिनों वित्तीय अनियमितताओं और अधूरे निर्माण कार्यों को लेकर सुर्खियों में है। पंचायत के पंचों और ग्रामीणों द्वारा जिला जनदर्शन में दर्ज कराई गई शिकायत के बाद शुरू हुई जांच ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायत में सरपंच पर लगभग 40 लाख रुपये की शासकीय राशि निजी खाते में जमा कर दुरुपयोग करने का आरोप लगाया गया था। मामले को गंभीर मानते हुए जनपद पंचायत ने जांच दल गठित कर पूरे प्रकरण की पड़ताल कराई थी। जानकारी के अनुसार 20 मई को गठित जांच दल ग्राम पंचायत गुरसिया पहुंचा था। जांच के दौरान पंचायत की बचत बैंक पासबुक, चेकबुक, बिल-वाउचर, रोकड़वाही पंजी, ग्रामसभा बैठक पंजी तथा विभिन्न निर्माण कार्यों से संबंधित अभिलेखों की विस्तृत जांच की गई। ग्रामीणों का दावा है कि जांच के दौरान पंचायत निधि के निजी खाते में आहरण का मामला सामने आया था और संबंधित पक्ष द्वारा इस तथ्य को स्वीकार भी किया गया था। हालांकि इस संबंध में अंतिम जांच प्रतिवेदन सार्वजनिक नहीं होने से कई प्रश्न अब भी अनुत्तरित हैं। इसी बीच जनपद पंचायत पोड़ी उपरोड़ा द्वारा जारी एक नोटिस ने पंचायत में चल रहे विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति को भी उजागर कर दिया है। उपअभियंता के निरीक्षण प्रतिवेदन के आधार पर जारी नोटिस में ग्राम पंचायत गुरसिया के विभिन्न निर्माण कार्यों की प्रगति को असंतोषजनक बताया गया है। नोटिस के अनुसार समग्र शिक्षा अभियान के तहत स्वीकृत प्रयोगशाला कक्ष, पुस्तकालय कक्ष और कला एवं संस्कृति कक्ष निर्माण कार्यों के लिए दूसरी किश्त की राशि जनवरी 2026 में जारी कर दी गई थी, लेकिन पांच माह बाद भी निर्माण कार्य दोबारा प्रारंभ नहीं किए गए। इसी प्रकार जिला खनिज न्यास मद से स्वीकृत माध्यमिक शाला भवन निर्माण कार्य में भी दूसरी किश्त जारी होने के छह माह बाद तक कार्य बंद रहने और वर्तमान में अत्यंत धीमी प्रगति का उल्लेख किया गया है। उचित मूल्य दुकान भवन निर्माण कार्य भी प्रारंभिक स्तर से आगे नहीं बढ़ पाया है। इसके अलावा कोसकट्टीपारा, गुरसिया और कोरवापारा में स्वीकृत आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण कार्य भी अधूरे पाए गए हैं। निरीक्षण के दौरान एक निर्माण कार्य में गुणवत्ता संबंधी कमियां मिलने पर सुधारात्मक निर्देश भी जारी किए गए थे। विभागीय मद से स्वीकृत बस्तीपारा और जूनापारा आंगनबाड़ी भवनों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं बताई गई है। नोटिस के अनुसार इन दोनों निर्माण कार्यों में केवल नींव स्तर तक काम हुआ है और वर्तमान में कार्य बंद है। निर्माण कार्यों की यह स्थिति तब सामने आई है जब अधिकांश योजनाओं के लिए लाखों रुपये की राशि पहले ही पंचायत को उपलब्ध कराई जा चुकी है।
मामले को और अधिक चर्चा में उस समय बल मिला जब जांच के कुछ दिनों बाद पंचायत स्तर से जारी एक पत्र में यह उल्लेख किया गया कि उच्च अधिकारियों द्वारा कथित रूप से शिकायतों से विचलित न होने का आश्वासन दिया गया था। इस दावे ने ग्रामीणों के बीच नई बहस छेड़ दी है। लोगों का सवाल है कि यदि जांच के दौरान वित्तीय अनियमितताओं और विकास कार्यों में लापरवाही के संकेत मिले थे, तो फिर अब तक जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई क्यों नहीं हुई।ग्रामीणों और पंचों का कहना है कि यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता का नहीं, बल्कि गांव के विकास और जनहित से सीधे जुड़ा हुआ है। जिन भवनों का निर्माण शिक्षा, पोषण और सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूत करने के लिए होना था, वे आज भी अधूरे पड़े हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती जांच को निष्पक्ष निष्कर्ष तक पहुंचाने और दोषियों के खिलाफ समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने की है।फिलहाल गुरसिया पंचायत का यह प्रकरण पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों की नजर अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है, क्योंकि इस मामले का परिणाम ही तय करेगा कि पंचायत स्तर पर वित्तीय जवाबदेही और विकास कार्यों की निगरानी कितनी प्रभावी है।

पंचायत गुरसिया के कोरवापारा में निर्माणाधीन नवीन आंगनबाड़ी केंद्र की दीवार निर्माण कार्य के दौरान ही ढह गई। दीवार गिरने की घटना ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और तकनीकी निगरानी की पोल खोलकर रख दी है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण प्रारंभिक चरण में ही इस तरह धराशायी हो रहा है, तो भवन की मजबूती पर गंभीर प्रश्न खड़े होना स्वाभाविक है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्माण में मानकों का पालन नहीं किया गया, जिसके कारण दीवार टिक नहीं सकी। मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल है। ग्रामीणों ने संबंधित विभाग से जांच कर दोषियों पर कार्रवाई तथा निर्माण कार्य की गुणवत्ता की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने की मांग की है।




