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डॉ श्याम बाबू गुप्ता :- एक अनुकरणीय व असाधारण व्यक्तित्व.

Korbavani.com- इस परिवर्तनशील संसार में जिसने जन्म लिया है उसकी मृत्यु निश्चित है। लेकिन जन्म उसी का सार्थक है जो अपने कार्यों से कुल , समाज और राष्ट्र को प्रगति के मार्ग पर अग्रसर करता है। महाराजा भर्तृहरि के इन महा वाक्यों को चरितार्थ करता श्री श्याम बाबू गुप्ता जी का जीवन वास्तव में अनुकरणीय एवं प्रेरणादायी है। उनका जीवन सत्य, संयम ,सेवा और सादगी का अद्भुत मिश्रण रहा है। उनके लिए स्वहित से पूर्व समाजहित और राष्ट्रहित रहा है। 10 जुलाई 1941 को छीबरानऊ (उत्तर प्रदेश) में श्री श्याम बाबू गुप्ता जी का जन्म एक संभ्रांत एवं शिक्षित परिवार में हुआ था। वे विद्यार्थी जीवन में भी अत्यंत कुशाग्र थे।तत्कालीन समय में जबकि शिक्षा के क्षेत्र में स्वर्ण पदक प्राप्त करना असाधारण उपलब्धि थी उन्होंने गणित विषय में जीवाजी विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की न सिर्फ डिग्री हासिल की अपितु स्वर्ण पदक प्राप्त कर अपनी असाधारण प्रतिभा का परिचय भी दिया।अपनी शिक्षा पूर्णकर सर्वप्रथम जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर मध्य प्रदेश में प्राध्यापक के रूप में चयनित हुए। शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सेवा का सफर जारी रखते हुए पेंड्रा में बी टी आई( बुनियादी शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान) में प्राध्यापक के रूप में चयनित हुए ,तत्पश्चात करगी रोड कोटा बिलासपुर में डीकेपी हायर सेकेंडरी स्कूल में प्राचार्य के रूप में अपनी सेवाएं दी। उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को शिक्षा देने में मदद करने के साथ ही वे सतत रूप से सामाजिक क्षेत्र में विभिन्न सेवा भावी कार्यों में भी सक्रिय रहे।
उनकी असाधारण प्रतिभा,ईमानदारी, सेवाभाव और समर्पण को देखते हुए उनका चयन जिला शिक्षा अधिकारी के रूप में भी हुआ लेकिन कुछ पारिवारिक कारणों की वजह से उन्होंने यह पद स्वीकार नहीं किया। श्री श्याम बाबू गुप्ता जी ने शिक्षा के महत्व को समझते हुए अपनी संतानों को भी उच्च शिक्षित किया। उनके परिवार में उनके दो पुत्र और दो पुत्री हैं। बड़े पुत्र डॉ संजय गुप्ता जो कि स्वयं में शिक्षा के क्षेत्र में एक जाना पहचाना नाम है ,विगत कई वर्षों से कोरबा जिले में अपनी सेवाएं इंडस पब्लिक स्कूल दीपका के प्राचार्य के पद पर दे रहे हैं, वहीं छोटे बेटे डॉक्टर अज्ञात गुप्ता ग्वालियर के एक प्रसिद्ध गणितज्ञ हैं। आप ने ग्वालियर के विद्यार्थियों को आई आई टी प्रवेश के प्रशिक्षण की शुरुवात की। आप टारगेट मैथेमेटिक्स और पिनाकल कोचिंग के डायरेक्टर के पद पर समस्त ग्वालियर में विद्यार्थियों को अपनी सेवाएं दे रहे है। श्री श्याम बाबू गुप्ता जी की दो बेटिया हैं श्रीमती विद्युत गुप्ता और डॉक्टर अलका गुप्ता। डॉक्टर अलका गुप्ता दिल्ली में विगत 20 सालों से भौतिकी के प्राध्यापक एवं विभगाध्यक्ष थी। वर्तमान में वे भारतीय भौतिकी शिक्षक संस्थान के कार्यकारिणी समिति में पदस्थ है। श्री श्याम बापू गुप्ता जी ने अपनी सेवाओं से निवृत होने के बाद अपने छोटे बेटे डॉ अज्ञात गुप्ता के साथ ग्वालियर में निवास रखते थे। कुछ वर्षों से उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं था, विगत दो माह से वो डायलिसिस पर थे। अंततः 18 जनवरी 2025 को वे परमात्मा के चरणों में विलीन हो गए। श्री श्याम बापू गुप्ता जी ने अपनी सेवाओं से निवृत होने के बाद अपने छोटे बेटे डॉ अज्ञात गुप्ता के साथ ग्वालियर में निवास रखते थे। कुछ वर्षों से उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं था, विगत दो माह से वो डायलिसिस पर थे। अंततः 18 जनवरी 2025 को वे परमात्मा के चरणों में विलीन हो गए।शिक्षा प्रशिक्षण,सेवा और सामाजिक कार्य से जुड़े होने के कारण वे लोगों की समस्याओं को गहराई से समझते थे और हर संभव समस्याओं को दूर करने का प्रयास करते थे। अत्यंत शालीन ,मृदुभाषी, शांत और विनम्र स्वभाव के धनी श्री श्याम बाबू गुप्ता जी अपने कार्यों एवं अपने स्वच्छ चरित्र के कारण सदैव लोगों के हृदय में वास करेंगे। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को कभी नहीं भूलाया जा सकता। जहां-जहां उन्होंने अपनी सेवाएं दी शिक्षा को एक नए आयाम तक पहुंचाया ।आज भी लोगों के हृदय में और लोगों के जुबान पर श्री श्याम बाबू गुप्ता जी का नाम एक गणितज्ञ के रूप में सर्वप्रथम आता है। वे एक अद्वितीय एवं अद्भुत शिक्षक थे और सभी के लिए प्रेरणा स्रोत थे और रहेंगे। उनके पढ़ाई करने का जज्बा, धैर्य और समर्पण वास्तव में अनुकरणीय और प्रशंसनीय थी। हम ऐसी अद्भुत प्रतिभा और व्यक्तित्व के धनी व्यक्ति की आत्मिक शांति हेतु ईश्वर से प्रार्थना करते हैं।

Kush Sharma

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