Korbavani.com। बरसात के बीच कोरबा शहर क्षेत्र में चल रहे नहर मरम्मत कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। जल संसाधन विभाग के क्षेत्र में लगभग 7 करोड़ रुपये की लागत से मानसनगर नहर से सोनालिया पुल तक नहर के मरम्मत एवं निर्माण का कार्य कराया जा रहा है। बताया जा रहा है कि कार्य अभी पूरा भी नहीं हुआ है, लेकिन कई स्थानों पर नहर का हिस्सा क्षतिग्रस्त होकर धंसने लगा है। मौके से सामने आई तस्वीरों में नहर की दीवारों में दरारें पड़ने के साथ ही कुछ हिस्सों के टूटकर नीचे खिसकने की स्थिति दिखाई दे रही है। कई जगह कंक्रीट की परत क्षतिग्रस्त नजर आ रही है, जबकि दीवार के ऊपरी हिस्से में मिट्टी का कटाव भी दिखाई दे रहा है। निर्माणाधीन नहर की ऐसी स्थिति ने कार्य की गुणवत्ता और निर्धारित तकनीकी मानकों के पालन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बारिश के दौरान नहर में पानी का दबाव बढ़ने की स्थिति में कमजोर हिस्सों के और क्षतिग्रस्त होने की आशंका जताई जा रही है। सवाल यह भी उठ रहा है कि निर्माण के दौरान बेस तैयार करने, मिट्टी की मजबूती, जल निकासी और कंक्रीट कार्य में निर्धारित मापदंडों का कितना पालन किया गया। विभागीय जानकारी के अनुसार, कार्य का ठेका विष्णु अग्रवाल से संबंधित बताया जा रहा है। वहीं मौके पर कार्य पेटी ठेकेदार के माध्यम से कराए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, पेटी ठेकेदार की भूमिका, निर्माण में इस्तेमाल की जा रही सामग्री और कार्य की तकनीकी गुणवत्ता को लेकर विभाग की ओर से स्थिति स्पष्ट किया जाना बाकी है। स्थानीय स्तर पर मांग उठ रही है कि जल संसाधन विभाग के अधिकारी मौके का तकनीकी निरीक्षण कर निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच करें। साथ ही जहां नहर क्षतिग्रस्त हुई है, वहां मरम्मत के बजाय आवश्यक तकनीकी प्रक्रिया के तहत उसे दोबारा मजबूत तरीके से तैयार कराया जाए। करोड़ों रुपये की लागत से कराए जा रहे इस महत्वपूर्ण कार्य में यदि निर्माण पूरा होने से पहले ही खामियां सामने आ रही हैं, तो इसकी निष्पक्ष तकनीकी जांच जरूरी मानी जा रही है। अब देखना होगा कि विभाग मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और निर्माण की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों पर क्या कार्रवाई करता है।
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