पहाड़ी कोरवा परिवार ने कहा बिजली, सड़क, पानी जैसे मूलसुविधा नहीं मिला तो चुनाव को करेंगे बहिष्कार.
Korbavani.com- इन दिनों हम आपको ऐसी हकीकत से रुबरु कराने जा रहे हैं जहाँ आजादी के 76 साल बाद भी विकास की किरण नहीं पंहुच पाई है। आज भी कोरबा मुख्यालय से महज 25 किलोमीटर की दुर पंचायत केराकच्छार अंतर्गत पहाड़ी कोरवा जनजाति नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। यहाँ न तो बिजली है, न पानी है, न सड़क है और न तो रहने के लिए प्रधानमंत्री आवास। जब मूलभूत सुविधाएं ग्रामीणों को नहीं मिलती इसके लिए शासन की महत्वकांक्षी योजनाओं का क्रियान्वयन करने वाला सिस्टम, जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी, व जन प्रतिनिधि सीधे तौर पर जिम्मेदार माने जा सकते हैं। यहां के पहाड़ी कोरवा परिवार ने बताया कि गांव बगधरीडांड, सरहीड, खोरीमौना, ढाबाडांड एवं लालमाटी मोहल्ला में बिजली न होने से रात होते ही अंधेरा छा जाता है. हाथी भालू जैसे खतरनाक जंगली जानवर का खतरा बना होता है कई बार पहाड़ी कोरबा परिवार के लोग जंगली जानवर का शिकार भी हो चुके हैं. समस्या को देखते हुए हमनेसरपंच सचिव एवं जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया गया. उसके बावजूद भी समस्या का निराकरण नहीं किया गया. दर्जनों पहाड़ी कोरवा परिवार 26 सितंबर मंगलवार जिला कलेक्टर पहुंच अपने मूलसुविधा की समस्याओं को लेकर शिकायत की पहाड़ी कोरवा परिवार ने की सड़क, बिजली, पानी जैसे मूलभूत सुविधा नहीं मिलती है तो हम सब मिलकर चुनाव का बहिष्कार करने को मजबूर रहेंगे. राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले विशेष पिछड़ी पहाड़ी कोरवा जनजाति के उत्थान के नाम पर यूँ तो तमाम योजनाएं बनती हैं। जो भ्रष्ट व्यस्था तंत्र के कारण विकास के दावों से कोसों दूर हो जाती है। ऐसी ही बदहाल व्यवस्था के साथ पंचायत केराकच्छर के पहाड़ी कोरवाओं के साथ अन्य लोग बदहाल जीवन जीने को मजबूर हैं।
कोरवा बस्ती के कई परिवारों को नहीं मिला आवास का लाभ जिसे मिला वह भी अधूरा पड़ा- जब बात हो गरीबी दूर करने की,लोगों को सुविधा देने की,किसी का जीवन स्तर ऊपर उठाने की तो तैयार होती है शासकीय योजना जो पात्रता के मापदंडों को पुरा करने के बाद लोगों तक पंहुचती है। पंचायत केराकच्छार में ठीक इसके विपरीत गंगा बह रही है।जहाँ जरुरतमंदों को शासकीय योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। आज तक यहाँ पहाड़ी कोरवाओं समेत अन्य वर्ग को प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत नहीं हुआ है।





