Korbavani.com। पोड़ी-उपरोड़ा विकासखंड की ग्राम पंचायत गुरसिया में पंचायत संचालन और शासकीय राशि के उपयोग को लेकर उठे विवाद ने अब जिला प्रशासन का दरवाजा खटखटा दिया है। पंचायत के पंचों और ग्रामीणों ने जनदर्शन में पहुंचकर कलेक्टर से शिकायत करते हुए सरपंच पति पर पंचायत कार्यों में अनाधिकृत हस्तक्षेप, मनमानी और शासकीय राशि के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि लगातार शिकायतों और जांच के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों द्वारा कलेक्टर को सौंपे गए आवेदन में उल्लेख किया गया है कि ग्राम पंचायत गुरसिया की निर्वाचित सरपंच हेमलता बघेल के स्थान पर उनके पति पंचायत के अधिकांश कार्यों में हस्तक्षेप करते हैं। आरोप है कि पंचायत से जुड़े निर्णयों में पंचों की सहमति की अनदेखी की जाती है और पंचायत बैठकों में पारित प्रस्तावों में भी बाद में बदलाव कर दिया जाता है। पंचों का कहना है कि ग्रामसभा और मासिक बैठकों को छोड़ दिया जाए तो सरपंच पंचायत कार्यालय में नियमित रूप से उपस्थित भी नहीं होतीं, जिससे पंचायत संचालन प्रभावित हो रहा है।शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि पूर्व में स्वीकृत निर्माण कार्यों की दूसरी किश्त की राशि मनमाने तरीके से निजी खाते में आहरित की गई, जिससे निर्माण कार्यों में अनावश्यक विलंब हुआ। ग्रामीणों का दावा है कि इस मामले की शिकायत पहले भी की गई थी, जिसके बाद जनपद पंचायत पोड़ी-उपरोड़ा स्तर से जांच कराई गई थी।सबसे महत्वपूर्ण बात यह बताई जा रही है कि जांच के दौरान संबंधित पक्ष द्वारा निजी खाते में शासकीय राशि आहरित किए जाने की बात स्वीकार किए जाने का उल्लेख जांच प्रतिवेदन में भी किया गया था। इसके बावजूद अब तक किसी प्रकार की प्रशासनिक या वैधानिक कार्रवाई नहीं किए जाने से ग्रामीणों में सवाल उठ रहे हैं। उनका कहना है कि जब जांच में अनियमितता सामने आ चुकी है, तो फिर कार्रवाई में देरी क्यों की जा रही है। ग्रामीणों ने शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि वर्तमान में पंचायत क्षेत्र में संचालित पांच आंगनबाड़ी भवनों और एक सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) भवन से संबंधित राशि का आहरण भी पंचों की सहमति के बिना किया गया है। इससे पंचायत में पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े हो रहे हैं।जनदर्शन में पहुंचे पंचों और ग्रामीणों ने कहा कि उन्होंने पहले भी कई बार संबंधित अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन जांच के बाद भी मामला केवल फाइलों तक सीमित रह गया। उनका आरोप है कि कार्रवाई नहीं होने से पंचायत स्तर पर मनमानी को बढ़ावा मिल रहा है और शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।अब ग्रामीणों ने कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो पंचायत व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर होगा। जनदर्शन में उठे इस मामले ने एक बार फिर पंचायतों में पारदर्शिता, जवाबदेही और सरपंच पति की भूमिका को लेकर बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजर जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।
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