कोरबा

ईश्वर हर जगह नहीं हो सकता, इसलिए उसने पृथ्वी पर मां बनाई है, वे हमारी शिक्षक, हमारी गुरु और हमारी आदर्श हैं, वे हमें दया, सहानुभूति और करुणा के मूल्य सिखाती हैं-डॉ. संजय गुप्ता..

Korbavani.com- माँ ईश्वर की अद्वितीय रचना, मातृ-दिवस के उपलक्ष्य में इंडस पब्लिक स्कूल दीपका में अध्ययनरत विद्यार्थियों के अभिभावकों ने बताया,

विश्व को माँ एक प्यारा और न्यारा शब्द है, शारदा साहू, (पुत्री-रिचा साहू, पुत्र-उरजीत साहू)- माँ साक्षात भगवान का रूप होती है । माँ कहने से ही हम एक अनंत शांति की अनुभूति करते हैं । माँ शब्द की गहराई को समझना आसान नहीं होता । माँ ही हमारी सर्वप्रथम शिक्षक होती है । माँ के बिना हमारा संसार अधूरा है । माँ बहुत प्यारा और न्यारा शब्द है । अगर हम शब्द हैं तो माँ हमारी भाषा है।

माँ से ही होती है जीवन की शुरूआत रूमकी हलदर(पुत्री-रिदिमा हलदर)- माँ शब्द से ही हमारे जीवन की शुरूआत होती है । कहते हैं ईश्वर सब जगह नहीं हो सकते इसलिए उन्होंने माँ की रचना की है । माँ निःशर्त हमसे प्यार करती है । माँ दया, स्नेह और प्यार का सागर होती है । माँ हम सबके लिए प्रेरणा होती है । माँ है तो सब कुछ है और माँ नहीं है तो कुछ भी नहीं है । माँ होना भी अपने आप में सबसे प्यारा अनुभव होता है । क्योंकि एक माँ होकर हम माँ की जिम्मेदारियों और महत्व को और भी अच्छी तरह समझते हैं ।

माँ ही संस्कृति और संस्कार की जननी अल्का वैष्णव (पुत्र-सक्षम वैष्णव)-माँ से ही हममें संस्कृति और संस्कार का प्रादुर्भाव होता है । आज हम जो हैं और जैसे हैं या हम यह कहें कि हमारी हर एक कार्य-व्यवहार पर माँ के द्वारा दिए गए संस्कारों की ही छाप है । माँ के बिना संसार अधूरा है जब मेरे बच्चे मुझे माँ कहते हैं तो मैं अंदर से प्रसन्नचित हो जाती हूँ । सच में माँ सबसे अमूल्य व अवष्मिरणीय शब्द है । इसी में पूरी सृष्टि समाई है ।

माँ और बच्चे का रिश्ता गहरा और निराला स्वाति सिंह (पुत्री-स्तुति सिंह)– माँ ने महीने तक अपने बच्चे को कोख में रखती है । नौ महीने बाद असहनीय पीड़ा सहकर बच्चे को जन्म देती है । इन नौ महीनों में बच्चे का एक अदृश्य गहरा रिश्ता बन जाता है । यह रिश्ता शिशु के जन्म के बाद साकार होता है और जीवन पर्यन्त चलता है । शिशु के जन्म के पश्चात सबसे पहला रिश्ता माँ से बनता है । माँ बनना और माँ कहलाना अपने आप में निराला होता है । दुनिया का कोई भी रिश्ता इतना मर्मस्पर्शी नहीं हो सकता । ममता और प्रेम के इस रिश्ते को सबसे श्रेष्ठ माना जाता है ।

माँ सभी के प्रेरणा का स्त्रोत होती है सुनीता श्रीवास (पुत्री-पलक श्रीवास, झील श्रीवास)- विश्व में यदि हमें कोई सबसे ज्यादा स्नेह और सम्मान देता है साथ ही हमारी हर छोटी-बड़ी गलतियों को माफ यदि कोई करता है तो वह होती है माँ । माँ जो अपने आप में संपूर्ण है । जिसकी कमी का एहसास हर एक को होता है । सबसे महान व्यक्ति और व्यक्तित्व होती है माँ । माँ सभी के लिए प्रेरणास्त्रोत होती है । वे हमारी जिंदगी में उन्नति का बिगुल बजाती है । वे हमें मंजिल तक पहुँचाकर ही दम लेती है ।

प्यार का सागर होती है माँ, अंशुल रानी (पुत्री-अर्शी चौधरी)– माँ विधाता का साक्षात स्वरूप होती है । दुनिया में यदि हमें कोई सबसे ज्यादा प्यार करता है तो वह माँ होती है । माँ का प्यार अनंत होता है । हमें किसी भी स्थिति में माँ का हृदय नहीं दुखाना चाहिए । माँ हमेशा हमें आगे बढ़ना और आत्मनिर्भर बनना सिखाती है । माँ के स्नेह और प्यार को स्वयं माँ बनकर समझना अद्वितीय होता है । माँ कड़ी धूप में छाँव होती है । माँ के आगे दुनियाभर की दौलत बेकार है । माँ तो माँ है जिसका कोई मूल्य नहीं वह तो अनमोल है ।

विद्यालय के प्राचार्य डॉ. संजय गुप्ता ने कहा– माँ तो कभी पैदा नहीं होती बल्कि माँ तो अवतरित होती है । बच्चे और माँ जैसा नाजुक, निर्मल, निःस्वार्थ और पवित्र रिश्ता कोई नहीं है । माँ हमेशा अपने बच्चे का कवच बनकर रक्षा करती है । माँ की दुआओं का खजाना कभी कम नहीं होता । माँ के जैसा निःस्वार्थ तो ईश्वर भी नहीं होता । थके बच्चे के लिए लोरियाँ और हारे बच्चे के लिए थपकियाँ केवल माँ के पास होती है । माँ संवेदना है, भावना है, एहसास है । माँ जीवन के फूलों में खुशबू का वास है । माँ मरूस्थल में नदी या मीठा झरना । माँ लोरी है, गीत है, प्यारी सी थाप है, माँ पूजा की थाली है और मंत्रों का जाप है । माँ केवल एक शब्द नहीं अपितु अपने-आप में पूरा संसार है । अपने अरमानों को सुलाकर हमारे सपनों को पूरा करने वाली माँ ही होती है ।

Kush Sharma

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