Korbavani.com। मातिन पहाड़ पर स्थित प्राचीन मां मातिन दाई मंदिर इन दिनों चैत्र नवरात्र के अवसर पर गहरी आस्था और धार्मिक उल्लास का केंद्र बना हुआ है। यहां की सबसे अनोखी परंपरा यह है कि मंदिर में देवी की मूर्ति नहीं, बल्कि उनके पवित्र आसन की पूजा की जाती है, जो इस धाम को विशेष पहचान प्रदान करती है। मान्यता के अनुसार, प्राचीन काल में मातिन क्षेत्र में गोड़वशी राजा का शासन था और तभी से मां मातिन दाई की आराधना प्रारंभ हुई, जो आज तक निरंतर जारी है। लोकविश्वास है कि माता पीपर कुंड में स्नान करने आती थीं और उनका मूल स्थान वर्तमान मंदिर के उत्तर दिशा में स्थित एक गुफा में था, जहां बैगा पुजारी पूजा किया करते थे। किंवदंती के अनुसार, एक बार पूजा के बाद बैगा पुजारी अपनी कटार गुफा में ही भूल गया और उसे लेने वापस गया, लेकिन फिर कभी लौटकर नहीं आया। इसके बाद उस गुफा का मार्ग पत्थरों से बंद कर दिया गया, जिसके निशान आज भी देखे जा सकते हैं। खतरनाक होने के कारण अब उस गुफा में जाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बाद माता के आसन को पहाड़ के शीर्ष पर साल वृक्ष के नीचे स्थापित कर पूजा-अर्चना शुरू की गई। बाद में जटगा निवासी स्वर्गीय अमरचंद सेठ द्वारा मंदिर का निर्माण कराया गया। तभी से श्रद्धालु यहां माता के आसन की पूजा कर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने की कामना करते हैं। चैत्र नवरात्र के दौरान 19 मार्च से 27 मार्च तक यहां भव्य धार्मिक आयोजन चल रहा है। इस वर्ष मंदिर परिसर में 575 ज्योति कलश प्रज्वलित किए गए हैं, जिससे पूरा क्षेत्र भक्ति और श्रद्धा की रोशनी से जगमगा उठा है। सभी वर्गों के श्रद्धालु बिना किसी भेदभाव के ज्योति कलश प्रज्वलित कर माता का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। नवरात्र के दौरान मंदिर परिसर में मेले जैसा माहौल रहता है। छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कठिन पहाड़ी चढ़ाई पार कर माता के आसन के दर्शन करने पहुंचते हैं और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। मातिन पहाड़ पर पानी और भोजन की स्थायी व्यवस्था नहीं होने के बावजूद सेवा भावना से ओत-प्रोत युवा लगातार श्रद्धालुओं की मदद में जुटे हुए हैं। मातिन दाई सेवा समिति, जटगा जल सेवा समिति और नव युवक मंडल के सदस्य नौ दिनों तक कांवर के माध्यम से पानी भरकर श्रद्धालुओं तक पहुंचा रहे हैं और चढ़ाई स्थल पर पेयजल की व्यवस्था भी कर रहे हैं। मातिन दाई मंदिर आस्था, परंपरा, रहस्य और सेवा का ऐसा संगम है, जहां हर वर्ष नवरात्र में भक्ति का अनूठा स्वरूप देखने को मिलता है और श्रद्धालुओं की अटूट आस्था यहां उन्हें बार-बार खींच लाती है।
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